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सड़क के गड्ढों में डूब रहा बच्चों का भविष्य

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आशीष कपूर
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बसोहली। यह सोचना शहर के लोगों को भले ही आश्चर्यजनक लगे, लेकिन बसोहली विधानसभा क्षेत्र की सिमनी-हदाट सड़क बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रही है। इसकी वजह यह है कि इस सड़क की मरम्मत नहीं होने से उसमें जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जो बारिश में तालाब बन जाते हैं। ऐसे में इस सड़क पर चलने में हादसों की आशंका के चलते बहुत की कम वाहन चालक इस मार्ग पर चलते हैं। इसका असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है। वाहन न मिलने से वे पैदल ही स्कूल जाते हैं और अक्सर लेट पहुंचने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सदानंद शर्मा, करतार सिंह, विक्रांत ठाकुर, दलजीत सिंह, उपासना सलारिया, ज्ञानचंद आदि का कहना था कि वे हर बार चुनाव में वोट डालते हैं, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि और सरकार की उपेक्षा के चलते सिमनी हदात सड़क की मरम्मत नहीं करवाई जा रही है। यही वजह है कि बसोहली विधानसभा क्षेत्र के सिमनी, हदाट और धार महानपुर के ग्रामीण अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि हदाट सिमनी सड़क इतनी ज्यादा बदहाल है कि इस पर वाहन चलाना बड़ा जोखिम उठाने जैसा है। इसलिए इस मार्ग पर बड़ी हिम्मत जुटा कर ही कोई चालक अपना वाहन इस मार्ग पर लाता है। इस समस्या को लेकर कई बार विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया गया, लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मार्ग पर इक्का-दुक्का ही वाहन चलने से ग्रामीणों को पैदल ही आवाजाही करनी पड़ती है। विद्यार्थियों को भी पैदल ही सफर तय करना पड़ रहा है, जिससे वे देरी स्कूल-कालेज पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।


सरकार के विकास के दावे पर सवाल
लोगों ने हैरानी जताते हुए कहा कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन आखिर वह उनकी आवाज क्यों नहीं सुनती है। बसोहली का धार महानपुर, सननघाट, बाडीघाट और साथ लगते अन्य इलाके आज भी विकास से कोसों दूर हैं। सरकार कहती है कि किसी भी क्षेत्र का विकास सड़कों पर निर्भर करता है, ऐसे में क्या वह जानबूझ कर इन इलाकों को पिछड़ा बनाए रखना चाहती है।
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20 किलोमीटर का सफर तय करने में वाहनों को लगता है दो घंटे का समय
2006-2007 में पीडब्ल्यूडी ने नाबार्ड के सहयोग से करीब 15 किलोमीटर कैलडी से धार महानपुर तक सड़क बनाई थी। इस मार्ग पर करीब आधा दर्जन पंचायतों की 25 हजार आबादी आवाजाही के लिए निर्भर है। सिमनी से महानपुर की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है। सड़क इतनी खराब है कि इस पर चलने वाले इक्का-दुक्का वाहनों को 20 किलोमीटर का सफर तय करने में दो घंटे का समय लग जाता है। ऐसे में आम लोगों और विद्यार्थियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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मंत्रियों के दौरे के समय ढक दिए जाते हैं गड्ढे
हदाट-सिमनी से महानपुर के बीच पड़ने वाले ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में बारिश के मौसम में अक्सर कोई न कोई सड़क बदहाल हो जाती है। स्थानीय लोगों की मानें तो बारिश का मौसम छोड़ दें तो भी क्षेत्र की ज्यादातर सड़कें वाहनों के चलने लायक नहीं हैं। गांव के लोग इन बदहाल रास्तों पर मिट्टी डाल कर या पत्थर बिछाकर जैसे-तैसे काम चलाते हैं। उनकी मानें तो जब कभी इन इलाकों में किसी मंत्री का दौरा होता है तो पीडब्ल्यूडी के लोग खस्ताहाल सड़कों की कुछ रिपेयर कर वाहन गुजरने लायक बना देते हैं, लेकिन कुछ समय बाद ही सब पहले जैसा ही हो जाता है।
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