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चौथे सप्ताह भी कोई भारतीय नहीं जा पाया पीओके

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चौथे हफ्ते भी कोई भारतीय नहीं जा पाया पीओके
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पाकिस्तान की तरफ से नहीं जारी किया जा रहा परमिट, पुंछ-रावलाकोट बस से आर-पार हुए 54 पीओके नागरिक
अमर उजाला ब्यूरो
पुंछ।
सोमवार को पिछले हफ्ते की ही तरह इस बार भी नियंत्रण रेखा के आर-पार बिछुड़े परिवारों को मिलवाने के लिए पुंछ-रावलाकोट बस सेवा चलाई गई। इससे 54 पीओके नागरिक चक्कां दा बाग की नियंत्रण रेखा के रास्ते आर-पार हुए। उन्हें रिश्तेदारों ने नम आंखों से विदा किया। चौथे हफ्ते भी अनुमति नहीं मिलने से कोई भारतीय पीओके नहीं जा पाया।
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जानकारी के अनुसार, सोमवार को दोपहर बाद करीब 2.45 बजे पुंछ जिला मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित चक्कां दा बाग की राह-ए-मिलन पर बने गेट खोले गए। इसके बाद दोनों तरफ के अधिकारियों ने आपस में हाथ मिलाया। इस अवसर पर सर्वप्रथम भारत की तरफ से 39 लोग पुंछ-रावलाकोट बस में सवार होकर नियंत्रण रेखा के उस पार गए, जिनमें सभी 39 पीओके नागरिक भारत में बसे अपने रिश्तेदारों के पास एक महीना बिताकर वतन लौटे। उस पार से रावलाकोट पुंछ बस में सवार होकर 15 लोग राह-ए-मिलन पार कर इस पार पहुंचे। इनमें सभी 15 पीओके नागरिक पहली बार भारत में बसे अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए इस पार आए। पाकिस्तान की तरफ से लगातार चार हफ्ते से किसी भी भारतीय को पीओके जाने का परमिट जारी न किए जाने से बिछुड़े परिवारों के लोगों में भारी रोष है। उनका कहना है कि पाकिस्तान अपने दिल में हिंदुस्तान के लिए कभी भी दोस्ती नहीं रखता है, जिसकी वजह से हम लोगों को पीओके में रहने वाले रिश्तेदारों से मिलने का बहुत ही कम मौका देता है, जबकि हमारी हुकूमत के प्रयासों से हर हफ्ते उस पार से बड़ी संख्या में हमारे रिश्तेदार इस पार आते हैं, क्योंकि हिंदुस्तान सही प्रकार दोस्ती निभाने काम कर रहा है।
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