भंडारण, कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा
कृषि ढांचे को मजबूत करने के लिए 143 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इसमें गोदाम और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया है जिससे फसल के नुकसान को कम करने और बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। फूड प्रोसेसिंग के लिए करीब 292 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। यह सेक्टर किसानों को उपज को प्रोसेस कर बेहतर कीमत का अवसर देता है और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देता है। रिपोर्ट में किसान उत्पादक संगठनों और स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। इन्हें कृषि, एमएसएमई और एग्री प्रोसेसिंग से जुड़े विभिन्न सेक्टरों के माध्यम से वित्तीय सहायता मिलेगी।
हाउसिंग के लिए 166 तो शिक्षा के लिए 98 करोड़ रुपये का प्रावधान
नाबार्ड के डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट मैनेजर राजेश कुमार ने बताया कि प्लान में हाउसिंग के लिए करीब 166 करोड़ रुपये और शिक्षा के लिए 98 करोड़ रुपये तय किए गए हैं जिससे बुनियादी सुविधाओं और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा सामाजिक ढांचे के लिए लगभग 99 करोड़ रुपये, निर्यात गतिविधियों के लिए करीब 110 करोड़ रुपये तथा रिन्यूएबल एनर्जी के लिए 5.04 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सिंचाई सुविधाओं की कमी, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोरी और योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी अभी भी प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।
आसान भाषा में समझिए क्या है क्रेडिट प्लान
पीएलपी यानी पोटेंशियल लिंक्ड क्रेडिट प्लान नाबार्ड द्वारा हर वर्ष तैयार किया जाने वाला जिला स्तरीय क्रेडिट प्लान है। इसमें जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कर्ज की जरूरत और संभावनाओं का आकलन किया जाता है। इसी आधार पर बैंकों को यह दिशा मिलती है कि किस सेक्टर में कितना ऋण दिया जाना चाहिए। यह योजना खुद पैसा उपलब्ध नहीं कराती बल्कि बैंकों के जरिए कर्ज वितरण की रूपरेखा तय करती है। जिला स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा भी की जाती है ताकि तय लक्ष्यों के अनुरूप कर्ज वितरण सुनिश्चित हो सके। इसका उद्देश्य कृषि, उद्योग और ग्रामीण क्षेत्रों में संतुलित विकास को बढ़ावा देना और आर्थिक गतिविधियों को गति देना है।
एक नजर में जिले का क्रेडिट प्लान
- एमएसएमई: 6,723 करोड़ रुपये
- कृषि: 2,656 करोड़ रुपये
- फसल उत्पादन: 2,133 करोड़ रुपये
- फूड प्रोसेसिंग: 292 करोड़ रुपये
- कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर: 143 करोड़ रुपये
- कुल प्लान: 9,781 करोड़ रुपये