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‘जान दे देंगे, पर सीबीआई जांच से पीछे नहीं हटेंगे’

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हीरानगर। रसाना मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग पर कूटा में आमरण अनशन पर बैठी चारों महिलाओं में से एक अनशनकारी महिला का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है। इसके बावजूद वह अस्पताल में भर्ती होने को राजी नहीं हो रही है। तबीयत खराब होने के बावजूद तीसरे दिन भी वह रसाना कांड की सीबीआई जांच की मांग पर अड़ी रहीं। उन्हाेंने कहा कि जान भी चली जाए तो परवाह नहीं, लेकिन बेकसूरों लोगों को नहीं फंसने देंगे। आमरण अनशन के तीसरे दिन इन महिलाओं के समर्थन में और ज्यादा लोग पहुंचे।
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सोमवार को तीसरे दिन डाक्टरों की एक टीम डाक्टर संजीव शर्मा के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। तहसीलदार हीरानगर गौरव शर्मा भी उनके साथ थे। अनशन पर बैठीं महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच के बाद त्रिशला देवी के शरीर में हो रही कमजोरी की बात करते हुए उनसे अस्पताल चलने का आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंनेे साफ मना कर दिया। त्रिशला ने कहा कि चाहे जान भी चली जाए वह अपनी मांग से नहीं हटेंगी। जांच के दौरान अन्य तीन महिलाओं के वजन में भी कमी पाई गई है। इन्हाेंने कहा कि जब उक्त मामले की जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, हम इसी तरह संघर्ष में डटे रहेंगे। सरकार अगर हमारी अगिभन परीक्षा ले रही है, तो हम भी पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। क्राइम ब्रांच मासूम बच्चों पर अत्याचार कर रही है। उसके लिए हमें थोड़ा बहुत कष्ट सहना भी पड़ा तो कोई फर्क नहीं पड़ता। सरकार ब्रांच के जरिए मासूम लोगों पर दहशत बना सकती है। उन्हें प्रताड़ित कर सकती है, लेकिन हमारी आवाज को नहीं दबा सकती। जब तक मामला सीबीआई को नहीं सौंपा तब यह संघर्ष जारी रहेगा और आखिरी सांस तक जारी रहेगा।

त्रिशला को अस्पताल नहीं पहुंचाया गया, तो और बिगड़ सकती है हालत: बीएमओ
बीएमओ हीरानगर ओंकार नाथ ने बताया कि अनशन पर बैठीं चारों महिलाओं के स्वास्थ्य जांच रविवार और सोमवार को भी की गई। सभी महिलाओं के वजन में कुछ कमी आई है। चारों में से त्रिशला में कमजोरी ज्यादा पाई गई है। उनको समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया गया, तो हालत और बिगड़ सकती है। सोमवार को भी उनको अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस वहां भेजी गई, लेकिन बहुत समझाने पर भी वे नहीं मानीं।
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सरकार पर लगाया बेरहम होने का आरोप
हीरानगर। अनशन पर बैठी महिलाओं के समर्थन में आगे आए हिंदू एकता मंच के नेताओं का कहना है कि सरकार पूरी तरह से बेरहम हो गई है। पहले लोगों पर लाठियां बरसाईं गईं और अब अनशन के तीसरे दिन भी महिलाओं से मिलने सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। मंच के नेता कांत कुमार ने कहा कि सरकार रसाना मामले की जांच अपने तरीके से कर रही है। इस जांच पर कोई भी उंगली उठाए, यह उसे सहन नहीं। क्राइम ब्रांच की जांच के तरीके से लोगों में भय है। क्राइम ब्रांच के अधिकारी दिन-रात कभी भी गांव में आकर बिना कोई वजह बताए या बिना स्थानीय पलिस को सूचना दिए, लोगों उठा लेते हैं। इससे प्रतीत होता है कि जांच किसी के इशारे पर हो रही है। मंच की मांग यही है कि मामले को सीबीआई को सौंपा जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अनशन पर बैठीं महिलाओं को कुछ हुआ तो पिछले दो माह जो आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चला, वह बेकाबू हो जाएगा। ब्यूरो
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