‘600 रुपये में घर चलाकर दिखाएं सरकार के मंत्री’
आंगनबाड़ी वर्कर्स ने मांग पूरी होने तक धरना नहीं खत्म करने को चेताया, युवा संगठन ने आंदोलन का किया समर्थन
अमर उजाला ब्यूरो
कठुआ। आंगनबाड़ी वर्कर्स ने राज्य सरकार से कहा है कि यदि उनका कोई मंत्री महज 600 रुपये में अपना घर चलाकर दिखाए तो वे अपना वेतन बढ़ाने की मांग नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार उनको एक माह में काम करने के एवज में महज 600 रुपये मेहनताना देती है। इतनी कम राशि में हम अपने परिवार को क्या खिलाएं, जबकि पहले से ही महंगाई आसमान छू रही है। बच्चों को कैसे पढ़ाएं, जबकि निजी स्कूल भारी भरकम फीस वसूलते हैं। अपना और अपने परिवार का दवा-इलाज कैसे करवाएं, जबकि आज दवाइयां काफी महंगी हो गई हैं।
उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि दो सप्ताह से वे धरने पर बैठी हैं, लेकिन सरकार का कोई मंत्री उनका हाल जानने नहीं आया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सरकार इसी तरह असंवेदनशील होकर कर्मचारी विरोधी रवैया अपनाती रहेगी, तो वह दिन दूर नहीं जब सभी विभागों के मुलाजिम अपनी एकता कायम कर उसकी ईंट से ईंट बजा देंगे। आंगनबाड़ी वर्करों के समर्थन में युवा संगठन ने भी सरकार की नीतियों का विरोध किया है। रविवार को बैठक का आयोजन कर युवा संगठन के सदस्यों ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर को उनका हक दिया जाए।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए सुरेश कुमार ने कहा कि एक तरफर सरकार महिला सशक्तीकरण की बात करती है तो दूसरी और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत भी नहीं बना सकती है। महज 600 रुपये देकर सरकार उनसे महीने भर काम लेती है। इसमें परिवार का गुजारा नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार में मंत्रियों को सोचना चाहिए कि क्या इतने से पैसे से घर चल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का महिला सशक्तीकरण का नारा एक छलावे से ज्यादा कुछ नहीं है। युवाओं को रोजगार के सपने दिखाने वाली पार्टियों के नेता आज सत्ता सुख भोग रहे हैं। अपना वेतन बढ़ाने के लिए तो वे संसद व विधानसभा में बवाल मचा देते हैं, लेकिन कर्मचारियों की उनको कोई फिक्र नहीं। संगठन के नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने वेतन बढ़ोतरी की मांग पूरी नहीं की तो वह भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे।