हीरानगर/कठुआ। गणतंत्र दिवस से ठीक एक सप्ताह पूर्व पाकिस्तानी गोलाबारी ने अंतरराष्ट्रीय सीमा को दहला कर रख दिया है। पाकिस्तान की गोलाबारी में पानसर गांव में मोर्टार की चपेट में आने से पांच लोग घायल हो गए। इनमें से को उपचार के लिए जीएमसी भेज दिया गया।
हीरानगर सेक्टर के पानसर, मनियारी, रठुआ और पहाड़पुर, बोबिया, कान्हा चक, छन्न लाल दीन, पाटी मेहरू, चक चंद्रा, करोल कृष्णा, करोल माथुरां आदि में सुबह 8.40 बजे पाकिस्तान ने गोलाबारी शुरू कर दी गई। इस बीच पानसर गांव के नजदीक गुज्जरों की बस्ती में एक मोर्टार आ गिरा, जिसमें पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए उपजिला अस्पताल हीरानगर पहुंचाया गया जहां से उन्हें जिला अस्पताल कठुआ रेफर कर दिया गया। जबकि घायल एक महिला को जीएमसी रेफर कर दिया गया। उसकी पहचान 28 वर्षीय रानी के रूप में हुई है। वहीं जिला अस्पताल कठुआ में उपचाराधीन घायलों की पहचान बीस वर्षीय सादिक, ग्यारह वर्षीय जुल्फां, सत्रह वर्षीय आमना, 65 वर्षीय मोहम्मद शरीफ के रूप में हुई है। गोलाबारी की चपेट में आकर साठ वर्षीय रहीम, बाइस वर्षीय इमाम हुसैन, मोहम्मद फारूक, मोहम्मद यूसुफ भी घायल हुए हैं। यह सभी पानसर इलाके के रहने वाले हैं और कुछ लोग अपने रिश्तेदार के घर आए हुए थे।
पाकिस्तान ने बढ़ाई रेंज
पाकिस्तान की ओर से शुक्रवार को हीरानगर सेक्टर में की गई गोलाबारी ग्रामीणों को दहशत में डालने की मंशा थी। इसी वजह से पाकिस्तान में लंबी दूरी तक मार करने वाले मोर्टार गोलों का प्रयोग किया। जिला अस्पताल में उपचाराधीन लोगों ने बताया कि ऐसा पहली बार हआ है कि इस इलाके को निशाना बनाया गया है जहां उनकी रिहायश है। ताबड़तोड़ गोलाबारी का मंजर इतना भयानक था कि सोचते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। गोलाबारी शुरू होने के बाद ग्रामीण जैसे ही मवेशियों को संभालने लगे इसी बीच एक मोर्टार का गोला आकर उनके नजदीक ही फट गया। घर में आए कुछ मेहमान और परिवार के सदस्य बुरी तरह से घायल हो गए। अफरा-तफरी फैलने पर पुलिस को जैसे-तैसे सूचना दी गई।
सीमावर्ती इलाकों में ठंडा पड़ा चूल्हा
शुक्रवार सुबह पाकिस्तानी गोलाबारी एकाएक ऐसे शुरू हुई कि ग्रामीणों को संभलने का मौका भी न मिला। जिसे जहां जगह मिली वहीं शरण ले ली। मशीन गनों और मोर्टार के गोलों के धमाकों के बीच घरों के चूल्हे भी ठंडे पड़ गए। घर का सब कामकाज जैसा जहां था वहीं छोड़कर लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आए। दहशत इस कदर व्याप्त थी कि गांव की गलियों में कुछ मिनटों के भीतर ही सन्नाटा पसर गया। पानसर, मनियारी और पहाड़पुर के जिन इलाकों में गोले गिरे वहां कोहराम मच गया। अमर उजाला से बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि दोपहर होने को आई है लेकिन अधिकतर घरों के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। लोगों ने रात से जो खाया है उसके बाद सुबह पाकिस्तान ने संभलने का मौका भी नहीं दिया। घरों में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भूखे प्यासे पूरा दिन गोलाबारी से सहमे रहे।
सीमा से पांच किलोमीटर दायरे के स्कूलाें में लटके रहे ताले
एक बार फिर सीमावर्ती इलाके के बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करती गोलाबारी के चलते शिक्षण संस्थानों पर ताले लटके रहे। जिला उपायुक्त की हिदायत के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी कठुआ ने भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से पांच किलोमीटर के दायरे के सभी स्कूलों को अगले आदेश तक बंद रखने के निर्देश जारी कर दिए गए। हीरानगर और मढ़ीन तहसील के स्कूलों को अगले आदेश तक बंद रखने को कहा गया है। हीरानगर, राजबाग के कई निजी स्कूलों में बच्चे सीमावर्ती इलाकों से आकर पढ़ाई करते हैं, ऐसे में इन स्कूलों में भी उपस्थिति कम रही। उधर, सुबह घर से निकले बच्चों की सलामती को लेकर परिवार के के सदस्य भी परेशान रहे। स्कूलों में छुट्टी की घोषणा के बाद कई बच्चे जहां शरण मिली वहीं रुक गए। कुछ बच्चों ने इसी बीच कुंथल के संतोषी माता मंदिर में भी शरण ली। एक ओर जहां गोलों की आवाज के बीच सीमावर्ती इलाके दहल रहे थे वहीं बच्चे किताबें लेकर अपनी पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए पढ़ाई करते नजर आए।
बख्तरबंद वाहनों में घायलों को पहुंचाया गया अस्पताल
पानसर में ग्रामीणों के घायल होने की सूचना के बाद प्रशासन हरकत में आ गया। बख्तर बंद वाहनों को गोलाबारी के बीच प्रभावित इलाकों की ओर रवाना कर दिया गया। घायल लोगों को बख्तरबंद वाहनों की मदद से उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचाने का काम शुरू हो गया। हीरानगर पहुंचे जिला उपायुक्त रोहित खजूरिया ने बताया कि प्रशासन के पास फिलहाल दो ही बख्तर बंद वाहन उपलब्ध हैं। और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन लोगों की हर संभव सहायता के लिए तैयार है। वहीं दिनभर स्थिति पर नजर रखे हुए एसडीएम हीरानगर सुरेश कुमार शर्मा ने बताया कि फायरिंग के दौरान लोगों को शिफ्ट नहीं किया जा सकता था। ऐसे में जहां जहां घायलों की सूचना मिल रही थी वहां से निकाला जा रहा था। बख्तरबंद वाहनों को मौके पर भेजकर पहले रेस्क्यू में पचास लोगों को निकाला गया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी गोलाबारी से 15 मवेशी घायल हुए हैं जबकि आठ की मौत हो गई है।
प्रशासन ने 19 राहत शिविर सक्रिय किए
पाकिस्तान की ओर से भारी गोलाबारी के बीच जहां लोग घरों में ही दुबके रहे वहीं प्रशासन ने एहतियातन 19 राहत शिविर सक्रिय कर दिए हैं। इनमें हायर सेकेंडरी स्कूल हीरानगर, मिडिल स्कूल छन्न खत्रियां, हाई स्कूल चड़वाल, हायर सेेंकेडरी चकड़ा, संतोषी माता मंदिर कुंथल, हायर सेकेंडरी कूटा, डिग्री कॉलेज हीरानगर समेत कई अन्य शामिल हैं। गोलाबारी का सबसे अधिक नुकसान पानसर इलाके में हुआ। गुज्जर समुदाय के लगभग 167 लोगों ने शाम तक मिडिल स्कूल गदियाल में शरण ले ली। लोगों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि पाकिस्तान को माकूल जवाब दिया जाना चाहिए। आम लोगों की रोज जान आफत में रहती है। गोलाबारी कब किसकी जान ले लेगी कुछ पता नहीं। बार्डर युनाइटेड फ्रंट के चेयरमैन घनश्याम शर्मा ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को कई बार आगाह किया गया है कि सीमावर्ती इलाके के लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करने के साथ ही फ्रंट ने जंतर-मंतर पर भी धरना दिया था लेकिन सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाए है। लिहाजा सीमावर्ती निहत्थे लोगों को अपने हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया गया है।