कठुआ। एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में सर्व यथार्थ कबीर पंथी संगठन ने प्रदर्शन किया और इस फैसले को वापस लेने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अगर इस आदेश को वापस नहीं लिया गया तो नौ अगस्त को भारत बंद के दौरान वह भी इस आदेश का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायालय का कार्य लोगों को न्याय देना है न कि लोगों को मिले अधिकारों को छीनने का। ऐसे में संसद को इस आदेश को वापस करना चाहिए और एससी/एसटी एक्ट को उनके मूल रूप में ही रहने दिया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों में शामिल कमलेश, देवराज आदि ने कहा कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है और देश का संविधान हर किसी को आजादी के साथ जीने का अधिकारी देता है। लेकिन देश के सर्वोच्च न्यायालय के दो जजों ने दलित वर्ग के लोगों के अधिकार को कमजोर किया है। उन्हें समान अधिकार दे रहे एक्ट को छेड़कर देश में अस्थिरता लाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस छेड़छाड़ से दलित लोगों पर अत्याचार फिर पहले जैसे बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा जब इस एक्ट का निर्माण किया गया तो उस समय दलित समाज पर हुए अत्याचारों को रोकने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि इस एक्ट को ओर सशक्त करने के बजाए इसे कमजोर किया गया। इसे सहन नहीं किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने बाद में जिला उपायुक्त के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा और कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वह भारत बंद में शामिल होकर इस बदलाव का विरोध करेंगे।
एक्ट में बदलाव से देश में पैदा होगी अशांति
एक्ट में बदलाव से दलित समाज पर अत्याचारों में बढ़ोतरी होगी। इस कानून के तहत दलित समाज में एक सुरक्षा की भावना बनी थी, लेकिन इसके साथ छेड़छाड़ कर उस भावना को कमजोर किया गया है। अब जिला पुलिस प्रमुख जांच करेंगे, उसके बाद एफआईआर होगी। तब तक मामला ठंडा हो जाता है। कई बार तो मामला खराब भी हो जाता है। एससी/एसटी एक्ट को पूर्व के प्रारूप में ही लागू किया जाना चाहिए। इसमें बदलाव से देश में अशांति ही बनेगी।
-सोमराज मजोत्रा, राज्य प्रधान, बसपा