सरकार बच्चियों की शिक्षा और सुविधाओं में सुधार के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां करती है। राजोरी जिले के कई दूरदराज के गांवों में आज भी बेटियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सरकार की तरफ से पर्याप्त सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। ऐसा ही एक मामला राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जीवन संगिनी कस्तूरबा गांधी के नाम पर शुरू किए गए केजीबीवी विद्यालय का है। खवास इलाके में बने इस विद्यालय के हास्टल में रहने वाली छात्राओं को भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले के खवास इलाके में स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) के हॉस्टल छात्राओं को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। हॉस्टल में रह रहीं बेटियों ने रोष जताते हुए कहा कि उनका हास्टल तो पशुओं के रहने योग्य भी नहीं है। सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल के कुछ कमरों में कक्षाएं चलाई जाती हैं और दो कमरों को हॉस्टल बनाकर उसमें 45 बच्चियों को रखा गया है। भवन की हालत इतनी जर्जर है कि बच्चियों को अक्सर डर सताता है कि कहीं बारिश होने पर वह गिर न जाए। छात्राओं ने बताया कि जिन कमरों में वे रहती हैं उसकी छत इतनी जर्जर हो गई है बारिश होने पर कमरे के अंदर पानी टपकने से तालाब बन जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन व सरकार से गुहार लगाई है कि वे सिर्फ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा न लगवाएं और उनके बारे में भी सोचें। बच्चियों ने नया भवन बनवाने की मांग की है। खवास के कुछ लोगों ने बताया कि केजीबीवी के हॉस्टल के भवन का निर्माण कुछ वर्ष पहले शुरू किया गया था, लेकिन थोड़ा सा काम करने के बाद ठेकेदार नजर नहीं आया। आज तक वह निर्माण कार्य अधर में लटका है। ऐसे में बच्चियों को भयंकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राजोरी के डीसी डॉ शाहिद इकबाल चौधरी ने कहा कि इस संबंध में जल्द से जल्द रिपोर्ट मंगवाकर समस्या का समाधान करवाया जाएगा। बच्चियों को शिक्षित करने के लिए पूरा जोर दिया जा रहा है। गौरतलब है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय और गरीबी रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवारों की बच्चियों को शिक्षित करने का काम करता है। इस विद्यालय की छात्राओं को आवासीय सुविधा भी प्रदान की जाती है। इसलिए लोगों की मांग है कि सरकार इस तरह के और विद्यालय दूरदराज के इलाकों में खोले और वहां हर तरह की सुविधाएं प्रदान करे।