चिशोती पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला
चिशोती में 75 लोग लापता बताए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों और चश्मदीदों का दावा है कि सैकड़ों लोग बह गए या मलबे में दबे हो सकते हैं। गांव में चारों ओर पत्थर, पेड़, लकड़ियां और मलबा फैला हुआ है।
चिशोती पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
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मुख्यमंत्री ने कहा, करीब 60 शव अब तक बरामद किए जा चुके हैं। अभी लापता लोगों की संख्या तय की जा रही है। राहत और बचाव कार्य के बाद हम यह भी जांच करेंगे कि जब मौसम विभाग ने चेतावनी दी थी, तब क्या प्रशासन कोई रोकथाम कदम उठा सकता था।
तबाही का मंजर:
चिशोती जो कि मचैल माता यात्रा का आखिरी मोटरेबल गांव है, वहां करीब दोपहर 12:25 बजे यह हादसा हुआ। तेज बारिश के साथ बादल फटने से आई बाढ़ ने अस्थायी बाजार, तीर्थयात्रियों के लंगर, एक सुरक्षा चौकी, 16 घर, 3 मंदिर, 4 पानी की चक्कियां, एक 30 मीटर लंबा पुल और दर्जनों वाहन तबाह कर दिए।
चिशोती पहुंचे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला
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राहत और बचाव कार्य:
सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और प्रशासन राहत व बचाव कार्य में जुटे हैं। भारतीय वायुसेना भी स्टैंडबाय पर है, और जम्मू व उधमपुर में दो एम आई-17 हेलिकॉप्टर और एक एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर को तैनात रखा गया है।
घायलों से मिले केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने किश्तवाड़ की बाढ़ त्रासदी पर कहा कि अब तक मलबे से 53 शव निकाले जा चुके हैं। यह एक अप्रत्याशित आपदा थी, जिसने सभी को चौंका दिया। स्थानीय लोगों ने प्रथम प्रतिक्रिया दल के रूप में शानदार काम किया।
उन्होंने बताया कि इस समय 67 घायल अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 5 को छुट्टी दी जा चुकी है। आपदा के समय वहां 1500 से 2000 लोग मौजूद थे। प्रधानमंत्री खुद पूरी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने उपराज्यपाल से भी बात की है। डॉ. सिंह ने कहा कि पूरा सरकारी तंत्र मिलकर जिस तरह राहत कार्य कर रहा है, वह देश के लिए उदाहरण बनेगा।