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इंटरनेशनल बार्डर पर भारत के जवाब से सुधरा पाकिस्तान

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जम्मू। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने वाले पाकिस्तान और सीमा पर भारतीय सेना के मुंहतोड़ जवाब का असर साफ तौर पर इंटरनेशनल बार्डर पर दिख रहा है। यूं कहा जाए कि भारत के कड़े रुख का असर पाकिस्तान पर हुआ है। पिछले पांच साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि पाकिस्तान की तरफ से रिहायशी इलाकों को टारगेट कर गोलाबारी न की गई हो। वर्ष 2018 के मई महीने में गोलाबारी हुई थी। इसके बाद से फिलहाल अब तब गोलाबारी नहीं हुई है। इक्का-दुक्का सीजफायर तोड़ने की घटना हो सकती है, लेकिन हालात सामान्य हैं।
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वर्ष 2018 में सबसे पहले जनवरी और मई महीने में सीजफायर तोड़ा गया था। कठुआ के लखनपुर से लेकर परगवाल बार्डर तक गोलाबारी हुई। 500 से अधिक मकानों को क्षति पहुंची। 20 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। सैकड़ों मवेशी मार गए और घायल हुए। आधा दर्जन जवान भी घायल हुए, लेकिन इसके बाद बीएसएफ के करारे जवाब और पाकिस्तान पर भारत के दबाव के चलते पाकिस्तान अब ऐसा करने की हिमाकत नहीं कर सका। वर्ष 2017 की बात करें तो पाकिस्तान की तरफ से सितंबर महीने में बार्डर गोलाबारी की गई। 2015 और 2016 में भी साल में हर छह महीने के बाद पाकिस्तान ने गोलाबारी की। दरअसल, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की पाकिस्तान के खिलाफ राजनीतिक कूटनीतिक, पाकिस्तान में घुसकर पहले सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक का असर बार्डर पर भी देखने को मिला है।
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