कठुआ। हीरानगर सेक्टर में गोलाबारी से दहशत के बीच बड़ी संख्या में लोग पलायन कर चुके हैं। काफी लोग ऐसे हैं जो गांव छोड़कर नहीं जाना चाहते। ग्रामीणों ने घरों से महिलाएं, बुजुर्गों और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर अपने रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जिला कठुआ के बाईस गांव गोलाबारी से प्रभावित होते हैं। यहां की लगभग बीस हजार आबादी एक बार फिर सरकार को कोसती नजर आई। घरों में दुबके लोग गोलाबारी थमते ही प्रशासन की ओर से भेजे गए बख्तरबंद वाहनों की मदद से गांव छोड़ते नजर आए। गांव के बुजुर्ग और युवाओं में राज्य और केंद्र सरकार के प्रति भारी रोष है वो गांव छोड़कर नहीं जाना चाहते। बसे बसाए आशियानों को तबाह होते देख उनका गुस्सा और भी बढ़ जाता है।
जिला उपायुक्त रोहित खजूरिया ने बताया कि प्रशासन सीमावर्ती लोगों की हर संभव सहायता के लिए तैयार है। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के लिए नौ राहत शिविर एक्टिवेट कर दिए गए हैं। कैंप कमांडरों के साथ साथ राहत शिविरों में बिजली, पानी, खानपान की व्यवस्था भी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के पास फिलहाल दो ही बख्तरबंद वाहन उपलब्ध हैं जरूरत पड़ी तो सेना और सीआरपीएफ से अतिरिक्त बख्तरबंद वाहनों की मदद ली जाएगी। जो लोग घर छोड़कर आए हैं उनके लिए सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल हीरानगर में व्यवस्था की गई है।