जम्मू संभाग में शिक्षा विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। वहीं इससे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। 2014 के शुरूआत में शिक्षा विभाग ने साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी कर चार हजार से ज्यादा नए शिक्षकों की सूची जारी की, लेकिन विवाद होने के चलते आज तक उन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है।
डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन जम्मू का कहना है कि एकेडमिक अरेंजमेंट के साथ स्टाफ की कमी को पूरा करने का हर संभव प्रयास चल रहा है।
प्रत्येक वर्ष जम्मू संभाग में नए सरकारी स्कूलों को खोलने के साथ पुराने स्कूलों को अपग्रेड किया जा रहा है। स्कूल खुल रहे हैं और अपग्रेड भी हो रहे हैं, लेकिन इन स्कूलों में नए शिक्षक नियुक्त नहीं हो रहे हैं। इस कारण दिन प्रति दिन जम्मू संभाग में शिक्षकों की कमी बढ़ती जा रही है।
शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी उधमपुर, डोडा, किश्तवाड़, भद्रवाह, राजोरी, पुंछ जिले में है। स्टाफ की कमी के कारण ही इन जिलों में बोर्ड का परीक्षा परिणाम भी गिर रहा है। आए दिन शिक्षकों की कमी दूर करने की मांग को लेकर विद्यार्थी व अभिभावक सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
इसी समस्या के समाधान के लिए 2013 में शिक्षा विभाग ने नए शिक्षकों की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार आरंभ किए। 50 हजार युवाओं ने साक्षात्कार के लिए आवेदन भरे। 2014 में साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी करके किश्तवाड़, जम्मू, रियासी, डोडा, पुंछ, सांबा, कठुआ, उधमपुर के लिए 4018 नए शिक्षकों की सूची जारी की।
अभी सूची जारी हुई ही थी कि जिन युवाओं के नाम सूची में नहीं आए, उन्होंने इसको लेकर विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने शिक्षा विभाग पर धांधली के आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में मामला अधर में लटकता प्रतीत हो रहा है।
डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन आरए इंकलाबी ने कहा कि एकेडमिक अरेंजमेंट के जरिये सरकारी स्कूलों में अस्थायी शिक्षक नियुक्त कर स्टाफ की कमी को पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
तीन हजार के वेतन पर अस्थायी शिक्षक नियुक्त किए जा रहे हैं। कुछ हद तक इससे राहत मिली है, लेकिन पूरी राहत नई नियुक्तियों के बाद ही मिलेगी।