झज्जर कोटली बस हादसे में मारे गए सभी दस लोगों के शवों को उनके पैतृक गांवों में भेज दिया है। बस चालक गणेश का शव मंगलवार को ही सड़क मार्ग से भेज दिया था। दो शवों को राजधानी एक्सप्रेस, पांच को लोहित एक्सप्रेस और दो शवों को एंबुलेंस से भेजा गया। बुधवार को हादसे में घायल 40 लोगों को भी छुट्टी दे दी। सभी को विशेष बस से भेजा गया है।
बस के साथ जीएमसी से एक एंबुलेंस में दो शव भेजे गए हैं, जो अमृतसर से ट्रेन में शिफ्ट हो जाएंगे। अस्पताल में अन्य 23 घायलों का इलाज जारी है, जिसमें छह की हालत गंभीर है । इनकी आज सर्जरी की जाएगी। जीएमसी प्रशासन के अनुसार अस्पताल में भर्ती अन्य घायलों को भी तीन-चार दिन में छुट्टी दे जाएगी। सभी घायलों पर विशेषज्ञ डाक्टर निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल सभी की हालत खतरे से बाहर है। इनमें अधिकांश घायलों को सिर, पैर और बाजुओं में चोट लगी है।
हादसे के पीछे लखनपुर शुल्क प्राधिकरण की लापरवाही भी आई सामने
झज्जर कोटली हादसे ने लखनपुर में बाहरी राज्यों की बसों के प्रवेश को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया है। एक ऐसी बस को प्रवेश करने की मंजूरी दी गई, जिसका फिटनेस सर्टिफिकेट तक नहीं था। प्रवेश शुल्क भी टोल टैक्स कटने के बाद लिया गया। इससे साफ है कि लखनपुर में बसों के प्रवेश देने में झोल है।
बस पर लगाए गए यूपी81सीटी 3537 नंबर का लखनपुर में एक राज्य से दूसरे राज्य में कटने वाला शुल्क सोमवार रात 1.46 मिनट पर काटा गया। इसके बाद टोल 1.33 मिनट पर काटा गया। इससे साफ पता चलता है कि जहां पहले प्रवेश शुल्क कटना चाहिए था, वहां पहले टोल काटा गया।
प्रवेश का शुल्क अंदाजे से काटा गया, जिसमें 13 मिनट का फर्क है। इन 13 मिनट के फेर में लखनपुर शुल्क वसूली प्राधिकरण की मिलीभगत साफ नजर आती है। दस्तावेजों से भी साफ नजर आता है कि कैसे अनफिट बस को प्रदेश में घुसने की अनुमति दे दी गई। इसका नतीजा यह हुआ कि10 लोगों की मौत हो गई और 64 लोग घायल हो गए।
बेटा मां की और पति पत्नी की मौत से बेखबर
इस हादसे में ललीता देवी की मौत हो गई है। ललीता के पति मनोज कुमार शर्मा और बेटे प्रिंस को इसकी जानकारी नहीं दी गई है। प्रिंस और उसके पिता मनोज दोनों की हालत गंभीर है। मनोज के सिर पर गहरी चोटें आई हैं, जबकि प्रिंस को भी सिर और बाजू में गहरी चोटें हैं। दोनों को अन्य रिश्तेदारों ने नहीं बताया है कि ललीता की मौत हो चुकी है।
हादसे से पांच मिनट पहले रुकी थी बस
बस में सवार अन्य यात्रियों का कहना है कि जिस वक्त हादसा हुआ था, उसके ठीक पांच मिनट पहले ही बस रुकी थी। इस दौरान यात्री शौच के लिए गए थे। लखनपुर से जम्मू तक बस तीन बार रुकी थी। यात्री उसी मंजर को याद करते हुए कहते हैं कि काश कुछ और देर रुक गए होते तो आज 10 जिंदगिंया उनके साथ होतीं।
घायलों को नहीं मिल रहा सही से उपचार
बस हादसे में सुरक्षित बचे यात्रियों का कहना है कि गंभीर घायलों को सही से उपचार नहीं मिल रहा है। कई के हाथ पैर टूटे हुए हैं, जिनकी जांच अभी तक नहीं हुई है। अस्पताल में ऐसे घायलों का प्राथमिकता के साथ उपचार किया जाना चाहिए। कई घायलों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने एक बार पूछने के बाद दोबारा से नहीं देखा।
पीएम ने किया दो-दो लाख रुपये देने का एलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू में हुए सड़क दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। बता दें कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार सुबह एक बस के गहरी खाई में गिर जाने से 10 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 64 अन्य लोग घायल हो गए थे।
पीएम ने हादसे को लेकर ट्वीट भी किया है। इसमें उन्होंने लिखा कि जम्मू-कश्मीर में बस दुर्घटना में मारे गए पीड़ितों के परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। इसी के साथ ही जम्मू के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) चंदन कोहली ने मंगलवार को कहा कि सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। इससे पहले एलजी मनोज सिन्हा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शोक जताा चुक हैं।