कश्मीर में वर्ष 2014 में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित झेलम नदी के तटबंधों को बहाल किया जाएगा। इसके अलावा अन्य कार्यों को भी अंजाम दिया जाएगा। यह सब कार्य अगले दो वर्षों के भीतर किए जाएंगे। इन पर 399 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
कमिश्नर सेक्रेटरी पब्लिक वर्क्स रोहित कांसल ने बताया कि 140 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण और संरचना के लिए अलग रखे जाएंगे। दो पुलों के निर्माण के लिए 40 करोड़ रुपये, जबकि नदी के बहाव और बाकी के कार्यों के लिए 35 करोड़ रुपये रखे जाएंगे।
कांसल द्वारा कमरवारी और मेहजूर नगर के अलावा कई अन्य स्थलों का जायजा लिया गया। इस दौरान उन्होंने बताया कि नदी और लड चैनल का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, ताकि इनकी वहन क्षमता बढ़ सके।
उन्होंने कहा कि पहली प्राथमिकता है नदी समेत लड चैनल की चौड़ाई को बहाल करना। वर्तमान में करीब 70 जगहों पर कश्मीर घाटी में निकर्षण का कार्य जारी है।
अभी तक करीब 5.86 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी की खुदाई की जा चुकी है। कांसल के अनुसार इस प्रोजेक्ट की परिकल्पना के तहत श्रीनगर से गुजरने वाली झेलम नदी से करीब सात लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी की खुदाई करनी है।
जो अगले 12 महीनों के भीतर की जानी है, जबकि बारामुला स्ट्रेक्च पर नौ लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी की खुदाई अगले 20 महीनों के भीतर की जानी है।
जानकारी के अनुसार श्रीनगर के पादशाही बाग से उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले की वुल्लर झील तक जाने वाली लड चैनल में 38,100 क्यूबिक मीटर के लक्ष्य के विरुद्ध 25,720 क्यूबिक मीटर निकर्षण का कार्य पूरा हो चुका है।