हीरानगर। भूमिहीन दलित परिवारों के लिए दी गई भूमि पर उन्हें बसाने की मांग को हीरानगर में चार सितंबर से शुरू हुआ आमरण अनशन शनिवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। सामाजिक इंसाफ मंच के बैनर तले अनशन पर बैठे तीनों अनशनकारियों की तबीयत लगातार खराब हो रही है। उनके वजन में गिरावट दर्ज की गई है। हीरानगर के तहसीलदार ने उन्हें अनशन समाप्त करने को कहा, लेकिन उन्होंने साफ इंकार कर दिया। उन्होंने मांग की कि जब तक जमीनों पर अवैध कब्जे हटाने का काम शुरू नहीं किया जाता और डीसी कठुआ इस संबंध में यहां आकर आश्वासन नहीं देते, तब तक वे धरना नहीं खत्म करेंगे।
अनशनकारी एवं मंच के अध्यक्ष बीएल कांडले ने कहा कि बड़े अफसोस की बात है कि अभी तक प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। हम प्रशासन और समाज कल्याण विभाग से यह पूछना चाहते हैं कि हमारी मांग जायज है या नहीं। हाई कोर्ट ने दोनों को यह आदेश दिए हैं या नहीं कि भूमिहीनों को उनकी जमीनों पर बसाया जाए। प्रशासन अपनी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर पा रहा। हम माननीय हाईकोर्ट के आदेश को लागू कराने का संघर्ष लड़ रहे हैं। अगर गलत कर रहे हैं तो हमें गिरफ्तार कर लिया जाए। प्रशासन और समाज कल्याण विभाग कोर्ट से ऊपर हैं तो हम गलत हो सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो हमारी मांग पूरी की जाए।
उन्होंने कहा 1965 में भूमिहीन दलित परिवारों को बसाने की घोषणा की गई। हीरानगर सब डिवीजन के गांव हरिया चक, जांडि, पथवाल, कोट पुन्नु में भूमि चयनित की गई, लेकिन एक इंच जमीन लोगों को नहीं मिली। जिसके बाद हमारे मंच के संयोजक आई डी खजूरिया ने माननीय हाईकोर्ट में वर्ष 2006 में जनहित याचिका दायर की। कोर्ट ने वर्ष 2012 में हमारे पक्ष में फैसला देते हुए जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग आदेश जारी किया कि इन भूमिहीनों को उनकी जमीनों पर जल्द से जल्द बसाया जाए।
आदेश के इतने सालों बाद भी करीब 200 परिवारों को अपना आशियाना अभी तक नहीं मिला है। जो जमीनें इन्हें मिलनी थीं उस पर भूमाफिया काबिज है। जिन्हें प्रशासन और कुछ राजनीतिज्ञों का संरक्षण है। अनशनकारियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए डॉक्टरों की टीम यहां पहुंची। जांच के दौरान इनके वजन में काफी गिरावट पाई गई और ब्लड प्रेशर में भी गिरावट दर्ज की गई। इसकी जानकारी तहसीलदार हीरानगर अवतार सिंह को मिली। उन्होंने अनशनकारियों से बात करते हुए इसे खत्म करने की अपील की। साथ ही यह भी कहा कि हमें 15 दिनों का समय दें। अनशनकारियों ने यहां से हटने साफ इंकार कर दिया। कहा कि इन लोगों की जमीनों पर कहीं एक सिरे से कंक्रीट निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए और यह आश्वासन डीसी कठुआ यहां आकर हमें दें तो हमें अनशन समाप्त कर देंगे।