चार्ल्स डिकंस की पंक्तियों से की थी फैसले की शुरुआत
पीठ ने अपने फैसले की शुरुआत 19वीं सदी के ब्रिटिश लेखक चार्ल्स डिकंस के उपन्यास ‘ए टेल ऑफ टू सिटीज’ की चंद पंक्तियों से की थी। जिसका मजमून कुछ यूं है...
यह सबसे शानदार समय था और सबसे खराब वक्त भी
कई बार, यह ज्ञान का युग था, यह मूर्खता का भी युग
यह विश्वास का युग था, यह अविश्वास का भी युग
यह उजाले का भी मौसम था, और अंधेरे का भी
यह उम्मीदों का वसंत था और निराशा की सर्दिया
हमारे सामने सब कुछ था और कुछ भी नहीं था,
हम सीधे स्वर्ग जा रहे थे, हम दूसरे रास्ते से भी जा रहे थे
यह वक्त अपने वर्तमान से काफी दूर था
अब कोलाहलपूर्ण वक्त में जीने के लिए मजबूर
अच्छा हो या बुरा, जो भी है अति है।
इन्होंने दायर की थी याचिका
बीते साल केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं के साथ टेलीफोन सेवाओं और अन्य संचार माध्यमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा अन्य पाबंदियां भी लगाई गई थी। इन पाबंदियों के खिलाफ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।