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जम्मू में 2जी और कश्मीर में शुरू हो सकती है ब्रॉडबैंड सेवा, घाटी में हालात की हो रही समीक्षा

Tue, 14 Jan 2020 10:50 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

  • मंडलायुक्त ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हालात की हो रही समीक्षा 
  • पहली बार इंटरनेट के संदर्भ को अनुच्छेद 19 से जोड़ा
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इंटरनेट - फोटो : Social media
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट के एक हफ्ते में समीक्षा के आदेश के क्रम में अगले कुछ दिनों में जम्मू में 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवा और कश्मीर में ब्रॉडबैंड सेवा शुरू हो सकती है। जम्मू के मंडलायुक्त संजीव वर्मा का कहना है कि हालात की समीक्षा की जा रही है। इस बारे में समीक्षा के बाद ही फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि कई जन प्रतिनिधियों और राजनेताओं ने उपराज्यपाल प्रशासन के अलावा न्यायालय में यह मामला उठाया था। 
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5 अगस्त, 2019 से जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन होने के बाद प्रदेश में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद रखी गई है। इंटरनेट सेवा बंद रहने से जम्मू-कश्मीर के व्यापार के साथ अन्य क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। पर्यटन को भी झटका लगा है। अगले कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाएं बहाल होने से लोगों को राहत मिल सकती है।  
 

पहली बार इंटरनेट के संदर्भ को अनुच्छेद 19 से जोड़ा

इंटरनेट इस्तेमाल के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार अनुच्छेद 19 का जिक्र किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2017 में एक फैसले में कहा था कि इंटरनेट का इस्तेमाल नागरिकों का हक है। गर्भ में लिंग परीक्षण के विज्ञापनों को बैन कर देने से इंटरनेट इस्तेमाल के अधिकारों में कटौती नहीं होती। वहीं, केरल हाईकोर्ट ने सितंबर 2019 में 18 साल की छात्रा की याचिका पर कहा था कि इंटरनेट इस्तेमाल को मौलिक अधिकार में शामिल बताया था।
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चार्ल्स डिकंस की पंक्तियों से की थी फैसले की शुरुआत

पीठ ने अपने फैसले की शुरुआत 19वीं सदी के ब्रिटिश लेखक चार्ल्स डिकंस के उपन्यास ‘ए टेल ऑफ टू सिटीज’ की चंद पंक्तियों से की थी। जिसका मजमून कुछ यूं है...

यह सबसे शानदार समय था और सबसे खराब वक्त भी
कई बार, यह ज्ञान का युग था, यह मूर्खता का भी युग
यह विश्वास का युग था, यह अविश्वास का भी युग
यह उजाले का भी मौसम था, और अंधेरे का भी
यह उम्मीदों का वसंत था और निराशा की सर्दिया
हमारे सामने सब कुछ था और कुछ भी नहीं था,
हम सीधे स्वर्ग जा रहे थे, हम दूसरे रास्ते से भी जा रहे थे
यह वक्त अपने वर्तमान से काफी दूर था
अब कोलाहलपूर्ण वक्त में जीने के लिए मजबूर
अच्छा हो या बुरा, जो भी है अति है।

 

इन्होंने दायर की थी याचिका

बीते साल केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया था। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवाओं के साथ टेलीफोन सेवाओं और अन्य संचार माध्यमों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा अन्य पाबंदियां भी लगाई गई थी। इन पाबंदियों के खिलाफ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद और कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
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