कैट आई स्टड्स(रात के समय सड़कों पर स्पीड ब्रेकर पर चमकने वाले साइन) की अधिक मूल्य पर खरीदारी के मामले में अदालत ने मंगलवार को आरोपी पूर्व एसई और दो एक्सईएन समेत चार लोगों को बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष वर्ष 2004 के इस मामले में आरोपियों के खिलाफ केस साबित नहीं कर सका।
एंटी करप्शन कोर्ट के स्पेशल जज वाईपी बोरने ने मामले पर सुनवाई के दौरान दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को साबित नहीं कर सका। खरीदारी और टेंडर में किसी तरह के हेरफेर के पुख्ता सबूत नहीं हैं। यह कहीं साबित नहीं होता कि अधिक रेट पर खरीद हुई है।
इस केस को लाने से पहले इस पर एक बार फिर से जांच होनी चाहिए थी। यह मामला पूरी तरह से केस की जांच का है, जिसे सही तरह से नहीं किया गया। इस केस से जांच का पहलू ही गायब है। पहले केस को साबित करना चाहिए था। फिर इस मामले में कलेक्शन करके कोर्ट में भेजना चाहिए था।
केस के मुताबिक इन अफसरों ने कैट आई स्टड, जैजू की अधिक रेट पर खरीददारी कर रुपयों का गबन किया और सरकारी खजाने में सेंध लगायी। सभी अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने इस डिवाइस को बिना टेंडर के ज्यादा कीमत पर खरीदा था।
आरोपियों में जम्मू के कठुआ सर्कल के तत्कालीन एसई कृष्ण कुमार अरोड़ा, मेडिकल कालेज तवी पुल डिविजन के एक्सईएन पुरुषोत्म कुमार, जम्मू-2 कंस्ट्रक्शन के सतपाल पंडोह और आर डीन ट्रेडिंग कारपोरेशन के राजिंदर महाजन शामिल थे।