उधमपुर। जिला अस्पताल में एंबुलेंस की सुविधा न मिलने पर मृत नवजात के शव को डिब्बे में बंद करके सुद्धमहादेव ले जाने वाले पिता व दादा ने अमर उजाला से बातचीत में चिनैनी अस्पताल, जिला अस्पताल पर कई गंभीर आरोप लगाए। दोनों ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करके न्याय दिलाया जाए।
बच्चे के दादा अकल दीन का कहना है कि 28 जनवरी को जिला अस्पताल में डीसी उधमपुर भी मौजूद थे। उन्होंने एंबुलेंस की मांग को डीसी के सामने रखने की कोशिश की थी, लेकिन डाक्टरों ने उसको पूरी बात डीसी के सामने रखने ही नहीं दी।
अकल दीन ने बताया कि जब गर्भवती बहु को लेकर चिनैनी अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल ने उपचार करने से मना कर दिया और तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया। उन्होंने चिनैनी अस्पताल में डाक्टरों सेे एंबुलेंस की मांग की तो मना कर दिया और डाक्टरों कहना था कि उनका केस कोई ज्यादा गंभीर नहीं है एंबुलेंस नहीं दी जा सकती। उन्होंने अपने वाहन में शनिवार को बहु को जिला अस्पताल पहुंचाया। जब अस्पताल पहुंचे तो वार्ड में तीन नर्स और एक आशावर्कर मौजूद थीं। कुछ समय के बाद डाक्टर आई, लेकिन उसने बहु की जांच नहीं की। कई बार मांग करने के बाद डाक्टर देखने के लिए नहीं आई तो वह जबरदस्ती डाक्टर के केबिन में चले गए, जिसके बाद डाक्टर खुद बाहर आ गई। उसने बहु की गंभीर हालत के बारे में पूरी बात बताई और अल्ट्रासाउंड के लिए बोला, लेकिन डाक्टर का कहना था कि अल्ट्रासाउंड वाला डाक्टर अस्पताल में मौजूद नहीं है, इसलिए आप मरीज को जीएमसी चले जाएं। तो उन्होंने डाक्टर से कहा कि वह लिख कर दे दें कि आप इलाज नहीं कर सकते हैं और हम जीएमसी ले जाएंगे।
इतना कहने पर डाक्टर ने दूसरे डाक्टर को बुलाकर बहु का अल्ट्रासाउंड कराया। इसके बाद जब रात को बहु बाथरूम गई तो प्रसव का दर्द शुरू हो गया और साथ में मौजूद महिलाएं उसेे उठाकर बेड पर ले आईं। कुछ समय के बाद दो नर्स भी पहुंच र्गईं और महिला ने बेड पर ही मृत नवजात को जन्म दिया। नर्स ने एक गत्ते का डिब्बा दिया और उन्होंने तौलिए में शव को बांध कर रख दिया। 28 जनवरी की सुबह नर्स से एंबुलेंस के लिए कहा और नर्स ने कहा कि सुबह दस बजे डाक्टर आएंगे, वही एंबुलेंस की व्यवस्था कराएंगे। सुबह साढ़े नौ बजे उन्होंने डाक्टर से एंबुलेंस की मांग की। इसके कुछ समय के बाद डीसी उधमपुर पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ करने के लिए पहुंच तो उन्होंने डीसी के सामने एंबुलेंस की मांग रखने का प्रयास किया। अभी डीसी को पूरी बताई ही थी कि अचानक एक डाक्टर आया और उनको अपने साथ किनारे ले गया और जल्द एंबुलेंस देने का आश्वासन देने लगा। इसके बाद ढाई घंटे तक परिवार के साथ एंबुलेंस की सुविधा के लिए भटकते रहे। एंबुलेंस के चालक से बात की तो उसने भी बिना अधिकारियों की अनुमति के जाने से इन्कार कर दिया। फिर एक डाक्टर कहने लगा कि आप डीसी के पास जाओ वही आपको एंबुलेंस की सुविधा प्रदान करेंगे। मजबूर होकर दोपहर करीब साढे़ 12 बजे अपने स्तर पर वाहन की व्यवस्था की और शिशु के शव को सिद्धमहादेव में अपने घर पहुंचाया। करीब ढाई घंटे तक नवजात को जन्म दे उसकी बहु बीमार हालत में जिला अस्पताल के बाहर पड़ी रही, लेकिन किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली। उनकी मांग है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला अस्पताल के ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कार्रवाई होने के बाद ही उनको अब चैन मिलेगा।
डीसी उधमपुर रविंद्र कुमार ने कहा कि जब अकल दीन उनके पास एंबुलेंस की मांग लेकर आया था तो उन्होंने सीएमओ को एंबुलेंस उपलब्ध कराने को कहा था। अब मामले की जांच चल रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।