श्रीनगर स्थित डल झील का नजारा...
- फोटो : बारिस जरगर
जम्मू-कश्मीर में नई औद्योगिक नीति 2021 का असर दिखना शुरू हो गया है। 1947 में आजादी के 75 साल बाद जम्मू-कश्मीर में एक वर्ष में रिकॉर्ड 2,200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ वित्तीय वर्ष 2022-23 में 10 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने के दावे किए गए हैं। उद्योग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अब तक कुल 5327 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिसमें आने वाले वर्षों में जम्मू कश्मीर में 66 हजार करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में 5,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश प्राप्त करने वाली औद्योगिक इकाइयों ने काम करना शुरू कर दिया है। ये उद्यम भविष्य में हजारों युवाओं को रोजगार देने में सक्षम बनेंगे। वर्ष 2022 से उद्योग विभाग जम्मू-कश्मीर ने 1,854 इकाइयों के लिए भूमि आवंटित की है, जिसमें से 854 ने प्रीमियम का भुगतान किया है। इसके अलावा 560 इकाइयों ने लीज डीड पर हस्ताक्षर किए हैं और एनआईपी के तहत अनिवार्य रूप से अपनी इकाइयों पर काम शुरू करने के लिए आवंटित भूमि पर कब्जा कर लिया है।
अगले 15 वर्षों में बदलेगी तस्वीर
विशेष रूप से नई औद्योगिक नीति में अगले 15 वर्षों के लिए जम्मू-कश्मीर के औद्योगिक विकास पर 28,400 करोड़ रुपये (284 अरब रुपये) का व्यय परिव्यय है, जो अब तक का सबसे बड़ा प्रोत्साहन होगा। इससे योजना अवधि में 20 हजार करोड़ रुपये (200 अरब रुपये) का निवेश और 4.5 लाख रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। यह पहली ब्लाक स्तरीय विकास परियोजना है जो जम्मू कश्मीर के भीतर उपलब्ध स्थानीय संसाधनों, कौशल और प्रतिभा का उपयोग करके औद्योगिकीकरण की प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर शुरू करने में मदद करती है।
इस तरह खुले द्वार
निवेशकों की सुविधा के लिए सरकार ने एकल खिड़की पोर्टल पर 18 विभागों की 167 सेवाएं उपलब्ध कराने की पहल की है। व्यापार सुधार कार्य योजना और ईज आफ डूइंग बिजनेस जैसी पहलों के कारण 352 बीआरएपी बिंदुओं का संकलन हुआ है। इससे 3188 बोझ अनुपालन कम हुए हैं। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू कश्मीर निवेश के केंद्र में उभरा है। जम्मू-कश्मीर के युवाओं के सामने नए जम्मू-कश्मीर की शुरुआत हुई है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर में 1995, 1998, 2004, 2016 में औद्योगिक नीतियां लाई गईं।