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बड़ी मछलियां पकड़ से बाहर, छोटों का नाम ही दिया

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जम्मू। रोशनी घोटाले में अब तक दर्ज की गईं एफआईआर पर हाईकोर्ट ने ताजा स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। अगली तारीख पर एंटी करप्शन ब्यूरो को अपडेट लिस्ट देनी होगी। 20 लाख कनाल भूमि पर भूमाफिया, नेताओं, अफसरों और राजस्व अधिकारियों के अतिक्रमण करने संबंधी कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर बुधवार को चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस ताशी रबस्टन वाली खंडपीठ ने ओपन सुनवाई की।
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इससे पहले एडवोकेट शकील अहमद ने एडवोकेट सुप्रिया चौहान और मोहम्मद जुल्करनैन के साथ अपीलकर्ता की तरफ से दलीलें पेश की। एंटी करप्शन ब्यूरो की तरफ से डिप्टी एडवोकेट जनरल रमन शर्मा ने दलीलें पेश की। इससे पहले शकील अहमद ने कोर्ट के ध्यान में लाया कि एडवोकेट अंकुर शर्मा ने जनहित याचिका दायर की थी। मांग रखी थी कि इस करोड़ों के घाटोले की जांच सीबीआई को दी जाए। हालांकि इसके बाद जम्मू, सांबा, उधमपुर, श्रीनगर, बडगाम और पुलवामा जिले के एसएसपी की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया। इनकी तरफ से विभिन्न कलेक्टरों और अवैध रूप से लाभ लेने वालों के खिलाफ 15 एफआईआर दर्ज की गईं। हाईकोर्ट ने वक्त वक्त पर इन एफआईआर की मानीटरिंग करने संबंधी निर्देश जारी किए हुए हैं, लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो की तरफ से खंडपीठ को मौजूदा स्टेटस की जानकारी नहीं दी गई। यह भी बताया कि दर्ज की गई 15 एफआईआर की जांच होने के बाद भी एंटी करप्शन ब्यूरो की तरफ से प्रॉसिक्यूशन तय नहीं किया गया। बताया कि तब रहे जम्मू के डीसी और डिव्काम के खिलाफ भी केस बनता है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जीएडी की तरफ से इन पर कार्रवाई का आदेश निकला था, लेकिन सिर्फ पटवारी, गिरदावर और नायब तहसीलदार स्तर के लोगों के खिलाफ जांच मंजूर की गई। जबकि बड़ी मछलियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। एडवोकेट शकील की दलीलों को सुनने के बाद खंडपीठ ने आदेश दिया कि वह सभी एफआईआर की मौजूदा स्थिति की स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। डिवकाम जम्मू को भी आदेश दिया है कि वह जेडीए की जमीन पर की गई चारदीवारी की जानकारी दें। जेएनएफ
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