1947 में जम्मू-कश्मीर राज्य के बंटवारे और आतंकवाद के चलते 70 साल पहले घाटी से विस्थापित होने वाले हिंदू-सिख समुदाय के सात लाख लोगों को उनकी भावनाओं के अनुरूप एक स्थान पर बसाए जाने और 1999 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की घोषणा के अनुरूप कश्मीर में हिंदू-सिख अल्पसंख्यकों के नरसंहार की जांच के लिए विशेष ट्रिब्यूनल का गठन करने की मांग की।
पनुन कश्मीर के नेता अश्विनी चुरूंगू ने कहा कि हिंदू-सिख समुदाय के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए परिसीमन में विधानसभा की पांच सीटें आरक्षित की जानी चाहिए। इसके साथ ही बेरोजगारों के लिए विशेष भर्ती अभियान भी चलाया जाना चाहिए।