कठुआ। ेबैसाखी पर हर साल खरीफ की फसल की बुआई के लिए किसानों को पानी की दरकार रहती है। पिछले लगभग एक दशक में हालात ऐसे हो गए हैं कि मुख्य नहर के चुनिंदा हिस्सों की सफाई तो सिंचाई विभाग करवा देता है, लेकिन जिन कूहलों से खेतों तक पानी पहुंचना है उनकी सफाई को लेकर सिंचाई विभाग और मंत्रालय के पास कोई योजना ही नहीं है।
विभाग पशोपेश में है कि मनरेगा के तहत कूहलों की सफाई करवाई जाए तो वहीं ग्रामीण विकास विभाग के पास कूहलों की सफाई की कोई योजना ही नहीं है। ऐसे में सिंचाई विभाग दूसरे विभाग पर आस लगाए खुद की कूहलों की बर्बादी को देख रहा है तो वहीं किसानों के खेतों तक पानी साल दर साल सिल्टिंग से कम होता जा रहा है। कई जगह कूहलों को मरम्मत की जरूरत है, जहां से पानी खेतों का न जाकर व्यर्थ बह जाता है, लेकिन वह भी समय पर नहीं हो पाई हैं।
सिंचाई विभाग पर खेतों तक पानी पहुंचाने की आस लगाए जिला की 2 लाख 25 हजार कनाल भूमि के मालिक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो हर साल वहीं सफाई करवाई जाती है जहां जरूरत होती है। इसबार भी कठुआ कनाल की सफाई का काम देरी से ही सही लेकिन शुरू हो चुका है, जिसे आनन-फानन में 31 मार्च को पूरा करना होता है।
ऐसे में जो हुआ सो हुआ जो नहीं हुआ, वह राम भरोसे ही रहता है। उस पर इस नहर की यदि सफाई हो भी जाए तो नौ डिस्ट्रीब्यूटरी के आखिरी छोर तक पानी पहुंच पाना बड़ी बात है, जो पिछले कई सालों से नहीं हो पाया है। इनसे निकलने वाली कूहलें अब दम तोड़ने की कगार पर पहुंच चुकी हैं जिनकी मरम्मत न होना चिंता का विषय है लेकिन सरकार इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही। किसानों की मानें तो हर वर्ष विभाग से इनकी सफाई के लिए मांग की जाती है लेकिन कभी भी इन कूलों नालों की सही से सफाई नहीं होती और किसानों को हर वर्ष खरीफ की फसल के लिए पर्याप्त पानी मिल ही नहीं पाता।
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इस समय मुख्य नहर में सफाई का काम चल रहा है। कूहलों की सफाई का काम भी जल्द ही शुरू होगा। छोटे नालों की सफाई पर विभाग की उच्च स्तरीय बैठक के बाद अभी तक कोई आदेश या प्रस्ताव नहीं आया है। उसके आने के बाद छोटे नालों में सफाई का काम भी शुरू करवा दिया जाएगा।
-अनिल गुप्ता, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, कठुआ