जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ जिले की शीतल देवी बिना हाथों के तीरंदाजी करती हैं और निशाना लगाने के लिए अपने पैरों और ठुड्डी का इस्तेमाल करती हैं। दक्षिण कोरिया में पैरा विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली शीतल अकेली बिना बाजू वाली पैरा तीरंदाज रहीं।
इसके पहले शीतल देवी ने पेरिस 2024 पैरालंपिक में पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने राकेश कुमार के साथ मिश्रित टीम कंपाउंड ओपन में कांस्य पदक जीता था। तब 16 वर्ष की शीतल ने चीन के हांगझाऊ में हुए एशियाई पैरा खेलों में दो स्वर्ण समेत तीन मेडल जीतकर इतिहास रचा था।
वह एक ही संस्करण में दो स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं। ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों में वह धनुष तक नहीं उठा पाती थी। उन्होंने दाएं पैर से धनुष उठाने का अभ्यास किया। दो साल की कड़ी ट्रेनिंग की। 2021 में बतौर तीरंदाज करियर की शुरुआत की। ट्रेनिंग के दौरान उनके लिए एक विशेष धनुष तैयार कराया किया। उनके कोच अभिलाषा चौधरी और कुलदीप वेदवान हैं।
राकेश ने रजत पदक जीता
पुरुष वर्ग की व्यक्तिगत स्पर्धा का खिताब भारत के 30 वर्षीय तोमन कुमार ने जीता। फाइनल में तोमन की भिड़ंत पेरिस पैरालंपिक कांस्य पदक विजेता भारत के ही राकेश कुमार से हुई। चार शॉट्स के बाद 20-40 के स्कोर पर राकेश के धनुष की पुली में तकनीकी समस्या आई, जिसके चलते उन्हें फाइनल से हटना पड़ा और तोमन ने पहली बार विश्व खिताब जीता। राकेश को रजत मिला।
मिश्रित स्पर्धा में भी छाई शीतल-तोमन की जोड़ी
चैंपियनशिप की मिश्रित टीम स्पर्धा में भी शीतल और तोमन ने भारत को कांस्य पदक दिलाया। उन्होंने ब्रिटेन की जोडी ग्रिनहम और नाथन मैकक्वीन को 152-149 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया।
जम्मू-कश्मीर की तीरंदाज शीतल के इस चैंपियनशिप में अब तीन पदक हो गए हैं। शीतल और सरिता की जोड़ी ने महिला कंपाउंड ओपन टीम स्पर्धा में रजत पदक भी हासिल किया था। वे फाइनल में तुर्किये से 148-152 से हार गई थीं।