जम्मू। जम्मू रेलवे स्टेशन देश के ए1 रेलवे स्टेशन में शुमार है। इसके बावजूद यह स्टेशन सुविधा और बुनियादी ढांचे में काफी पीछे हैं। आधुनिकता के दौर में भी यहां ट्रेनों की धुलाई और सफाई मैनुअली होती है। इससे समय और पानी दोनाें की बर्बादी हो रही है। स्टेशन पर आटोमेटिक ट्रेन वाशिंग प्लांट अब भी सपना बना हुआ है।
रेलवे वाशिंग लाइन में प्रतिदिन करीब दस ट्रेनों की सफाई और धुलाई की जाती है। इसके साथ कुछ सेकेंडरी ट्रेनों की सफाई भी होती है। एक ट्रेन में 24 के करीब बोगियां होती हैं। एक ट्रेन की सफाई और धुलाई में 12 स्टाफ की टीम 8 घंटे का समय लगता है। इसमें करीब ग्यारह से बारह सौ लीटर पानी खर्च होता है। रेलवे निजी कंपनियों के हवाले ट्रेनों की सफाई और धुलाई का जिम्मा सौंपती है। अकसर सफर के दौरान ट्रेन सफाई को लेकर यात्रियों की समस्या रहती है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन सफाई में पानी तो खर्च होता ही है, उस पर वाशिंग लाइन में व्यर्थ बहने वाले पानी की री-साइकिलिंग नहीं होना चिंता का विषय है। इस संबंध में रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन की सेकेंड एंट्री का काम पूरा होने के बाद भी आटोमेटिक ट्रेन वाशिंग प्लांट लगाया जाएगा। वर्तमान में ऐसी कोई योजना नहीं है।
नहीं होती री-साइकिलिंग, कैसे बचेगा पानी
रेलवे वाशिंग लाइन में वर्तमान में 15 हजार लीटर के करीब रोज पानी खर्च होता है। इससे ट्रेनों की सफाई और धुलाई की जाती है। वहीं वाशिंग लाइन में वाटर री-साइकिलिंग की योजना नहीं होने से पानी बर्बाद हो जाता है।
आटोमेटिक ट्रेन वाशिंग मशीन से आधे घंटे में धुलेगी ट्रेन
अगर वाशिंग लाइन में आटोमेटिक ट्रेन वाशिंग मशीन लग जाती है, तो एक ट्रेन महज 20 मिनट से आधे घटे के समय में धुल जाएगी। वर्तमान में एक ट्रेन को धोने में 12 लोगों की टीम करीब आठ घंटे में सफाई कर पाती है।