जम्मू। मुंशी जी ने बाजार से लाटरी का टिकट खरीदा लिया है। उन्हें लाटरी निकलने पर इतना अटल भरोसा है कि उन्हाेंने नौकरी तक छोड़ दी हैं। दिन भर घर में अमीर आदमी बनने का ख्वाब देखते हैं। लाटरी के पैसों का कहां और कैसा उपयोग किया जाए, इसे लेकर योजना बनाते हैं। लाटरी जीतने के पीछे मुंशी जी सोच और पागलपन से पूरा परिवार परेशान है। नौकरी छोड़ने पर मुंशी का तर्क है अमीर आदमी चार पैसों के लिए दिन भर काम क्यों करे।
यह दृश्य रविवार को नटरंग स्टूडियो का है। यहां लाटरी का टिकट नाटक का मंचन किया गया। संडे थियेटर सीरीज के तहत मंचित किए गए इस नाटक ने दर्शकों को ख्वाबों में नहीं जीने का संदेश दिया। उन्हें हकीकत की दुनिया से रूबरू कराया गया। नाटक का लेखन शौकत तनवी और निर्देशन नीरज कांत ने किया।
नाटक की कहानी उस समय मोड़ लेती है, मुंशी जी की साली की अचानक मौत हो जाती हैं। इससे पूरा परिवार सदमे में है, पर मुंशी जी पूरा ध्यान लाटरी के पैसों पर ही हैं। नाटक दर्शाया गया कि कैसे इंसान आसनी से पैसे कमाने की इच्छा में सब कुछ भूल जाता है।