- अब इंटरग्रेटेड पावर डेवलपमेंट योजना से खर्च होंगे 1600 करोड़, अपग्रेड होंगे ट्रांसफार्मर और खंभे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में ग्रामीण इलाकों में बिजली ढांचा अभी भी कमजोर है। कहीं तारें जमीन को छू रही हैं तो कुछ इलाकों में अस्थायी जुगाड़ कर तारों को पेड़ों के सहारे लटकाया गया है। मौसम खराब होने पर बिजली कारपोरेशन को नुकसान झेलना पड़ता है।
आंधी चलने पर ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। फरवरी से लेकर अभी तक कारपोरेशन को 44 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। अब ढांचे को तीन साल में मजबूत किया जाएगा। इंटरग्रेटेड पावर डेवलपमेंट योजना (आईपीडीएस ) के तहत 1600 करोड़ की लागत से ये काम होगा। वार्ड नंबर 75 में हालात यह हैं कि गांव अकलपुर में बिजली के खंभे टूटे हुए हैं। तारें लोगों के घरों की छतों से गुजर रही हैं।
इसके अलावा गांव पतरयाल, संग्रामपुर, बंडपातियां में तारें जमीन को छू रही है। लोगों को संभल कर गुजरना पड़ता है। पूर्व पार्षद घार सिंह ने कहा कि कई बार मुख्य अभियंता को भी बताया गया मगर बीते दस सालों में व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया। इसके अलावा बिश्नाह, अखनूर के अंतर्गत ग्रामीण इलाकों में भी बिजली ढांचा तूफान आने पर जवाब दे जाता है। बता दें कि प्रदेशभर में प्रधानमंत्री डेवलपमेंट प्रोग्राम से 2015 से लेकर 2019 तक 1200 करोड़ रुपये की राशि बिजली ढांचे पर खर्च की गई।
इसके अलावा 2021 तक दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत 2806 करोड़ रुपये विभिन्न कार्यों पर खर्च हुए। ग्रामीण और शहरी इलाकों में ट्रांसफार्मरों को अपग्रेड करने से लेकर तारें बदलने का काम होना बाकी है। मौजूदा समय में साठ प्रतिशत तक ही काम हो पाया है। शेष 40 फीसदी काम होना है। ग्रामीण इलाकों में बिजली खंभों के अलावा के ट्रांसफार्मर स्थापित होने हैं।
योजना के तहत तीन साल में काम पूरा किया जाना है। नगर निगम के साथ जुड़े नए वार्डों में भी बिजली ढांचा मजबूत नहीं हो पाया है। वार्ड नंबर 72 से 74 के अंतर्गत कई इलाकों खंभे और ट्रांसफार्मर लगाए जाने हैं।
कोट
बिजली ढांचे को अब मजबूत करने के लिए इंटरग्रेटेड पावर डेवलपमेंट योजना के तहत काम होगा। ग्रामीण इलाकों के लिए टेंडर करवाए जा रहे हैं। पहले भी योजनाओं के तहत काम हुआ है।
- मनहर गुप्ता, मुख्य अभियंता, बिजली कारपोरेशन