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एक घंटे की भारी ओलावृष्टि में 100 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत

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राजोरी। जिले के थन्नामंडी इलाके में मंगलवार की शाम कुदरत का कहर टूट गया। शाम को एक घंटे तक हुई भारी ओलावृष्टि से 100 से ज्यादा भेड़-बकरियों की मौत हो गई। एक घंटे में ही कई इलाकों में तीन फुट से ज्यादा ओलावृष्टि हो गई थी, जिससे खासकर बागवानी की फसल को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
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जानकारी के अनुसार थन्नामंडी इलाके में शाम करीब पांच बजे अचानक ओलावृष्टि शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि ओले जिसके भी शरीर पर गिरे वहां दाग बन गया। ऐसा लग रहा रहा था जैसे कुदरत धरती पर पत्थरबाजी कर रही हो। डीसी राजोरी डॉ शाहिद इकबाल चौधरी ने बताया कि ओले गिरने से नुकसान की खबर लगते ही एसडीएम थन्नामंडी, एसडीपीओ थन्नामंडी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने बिना समय गंवाए राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया था। तेज बारिश व ओलावृष्टि के चलते बचाव और राहत कार्य में भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रात नौ बजे तब ओलावृष्टि के नीचे से दबी 100 भेड़-बकरियों के शव निकाल लिए गए थे, हालांकि राहत व बचाव कार्य अभी तक जारी था। इसलिए ऐसी आशंका जताई गई है कि इसमें और भी भेड़ बकरियां ओलों के परत के नीचे दबी हो सकती हैं। डीसी ने बताया कि पशुपालन विभाग से डॉक्टरों की टीम को भी मौके पर भेज कर जो मवेशी घायल थे उनको मरहम पट्टी का काम शुरू कर दिया गया है। डीसी ने बताया है कि कुछ बक्करवाल परिवार अपनी भेड़-बकरियों को लेकर कश्मीर की तरफ लेकर जा रहे थे। प्रभावित परिवारों को डीसी ने तीन लाख की तात्कालिक मदद दी है। इसके साथ ही नुकसान का जायजा लेने के लिए एक टीम का गठन किया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर बाद में भी मदद मुहैया करवाई जाएगी। देर रात समाचार लिखे जाने तक बीआरओ की टीम अपनी मशीनों के साथ सड़कों से ओलों की परत को हटाने और बचाव कार्य में लगी हुई थी। डीसी ने बताया कि थन्नामंडी के स्थानीय लोगों ने सड़क पर समय पर बचाव और निकासी के लिए बहुत मदद की।

नाले में ओले और बारिश का पानी जमा होने से दलदल बना मौत की वजह
एसडीपीओ इफ्तकार अहमद चौधरी ने बताया कि कालाकोट और नौशेरा के मैदानी इलाकों से बक्करवाल समुदाय के लाग अपनी भेड़-बकरियों को साथ लेकर मुगल रोड के रास्ते से कश्मीर घाटी की ओर जा रहे थे। इस दौरान बक्करवाल परिवार एक साथ अपनी भेड़ बकरियों के साथ थन्नामंडी के ग्रिड स्टेशन के पास पहुंचे थे कि ओले गिरने का सिलसिला शुरू हो गया। जिस स्थान पर वे अपने मवेशियों के साथ मौजूद थे, वहां आसपास की पहाड़ियों के बीच बहने वाले नाले में ओले और बारिश का पानी जमा हो गया। इससे वहां दलदल जैसा बन गया। बक्करवाल समुदाय के लोगों ने तो किसी तरह इससे अपनी जान बचा ली, लेकिन मवेशी नहीं बच पाए। प्रभावित बक्करवाल परिवारों में मोहम्मद फारूक पुत्र अब्दुल्ला, मोहम्मद असलम और मोहम्मद बशीर पुत्र सैन, मोहम्मद जुबेर पुत्र बाबू, कामा पुत्र मोहम्मद याकूब, मोहम्मद तारिस पुत्र मोहम्मद शरीफ, मोहम्मद इकबाल पुत्र मोहम्मद यासीन और मोहम्मद यासीन पुत्र सैन मोहम्मद सभी अंदरूठ के रहने वाले हैं।
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ओलों की चोट और शून्य से नीचे तापमान हो सकता है मौत की वजह
पशुपालन विभाग के चिकित्सक डॉ. आशीष महाजन ने बताया कि अचानक ओलावृष्टि होने से भेड़-बकिरियों को अंदरूनी चोटें आई होंगी। जहां वे खड़ी थीं वहां ओलों का पानी जमा होने से दलदल बन गया, जिसका तापमान शून्य से भी कम होगा। ऐसे में भेड़ बकरियों के शरीर का तापमान काफी कम हो गया होगा, जो उनकी मौत की वजह बना होगा।

बाल-बाल बचे बक्करवाल समुदाय के बच्चे
बताया गया है कि जिस स्थान पर भेड़-बकरियां दलदल में फंसी थीं, वहां बक्करवालों के बच्चे भी थे। बक्करवाल परिवारों के सदस्यों ने किसी तरह से अपने बच्चों को दलदल में फंसने से बचा लिया व उन्हें अपने कंधों पर उठा कर सुरक्षित स्थानों पर ले गए, जिससे उनकी जान बची।

पहले कभी नहीं देखा कुदरत का ऐसा डरावना मंजर
ओलावृष्टि के कारण अपनी 100 से ज्यादा भेड़ बकरियां खो चुके बक्करवाल परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य मोहम्मद जात ने बताया कि वे पांच दशकों से ज्यादा वक्त से इस रास्ते से कश्मीर घाटी की ओर आवाजाही करते रहे हैं, लेकिन कभी भी कुदरत का ऐसा कहर नहीं देखा। उन्होंने अपने परिवार और बच्चों की जान बख्स देने के लिए खुदा का शुक्रिया अदा किया।

जिला प्रशासन ने पहले ही जारी कर दी थी एडवाइजरी
जिला प्रशासन ने दो दिन पहले रविवार को ही एडवाइजरी जारी कर पहाड़ों का रुख करने वाले बक्करवाल समुदाय के लोगों को आगाह कर दिया था कि अगले तीन-चार दिनों में पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश, ओलावृष्टि और तूफान आने की संभावना है। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि कोई भी बक्करवाल परिवार अपने मवेशियों के साथ आगे बढ़ने से पहले मौसम को भांप ले और बादल छाने की स्थिति में वे यात्रा न करें। यदि प्रभावित परिवारों ने इसे माना होता तो शायद इस तबाही से बचा जा सकता था।

थन्नामंडी में फलों की फसल तबाह
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद ने बताया कि थन्नामंडी में सेब, अखरोट, आड़ू, खुबानी, नाशपाती, पूलम आदि फल होते हैं। इन दिनों इन सभी फलों के पेड़ों पर फूल या छोटे फल आए हैं। ऐसी में जितनी भयंकर औलावृष्टि हुई है, उससे बागवानी को भयंकर नुकसान पहुंचा है। अनुमान लगाया जा रहा है कि थन्नामंडी में फलों की फसल बर्बाद होने से इस बार बागवानों की कमर टूट जाएगी।
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