नौशेरा। जिला की मांग कर रहे नौशेरा में पिछले 15 दिनों से लगातार आंदोलन चल रहा है। जिसका असर होली पर भी दिखाई पड़ा।
वीरवार को स्थानीय लोगों ने जिला नहीं बनाए जाने के विरोध में होली के त्योहार का बहिष्कार किया। हर ओर मातम का माहौल छाया हुआ था। महिलाओं और बच्चों के चेहरे पर सरकार के प्रति रोष साफ नजर आ रहा था। होली पर चौराहो पर रंगों में जश्न में डूब जाने वाले युवा थाने में जेल भरो आंदोलन के लिए एकजुट हुए थे। हर ओर सन्नाटा पसरा था। नौशेरा त्योहार के दिन भी खुशी के माहौल से कई कोस दूर था। स्थानीय लोगों ने इसके पीछे सरकार का दोषी बताया। पूरे नौशेरा में होली का बहिष्कार करने के लिए व्यापक स्तर पर लोगों से अपील की गई। आजादी के बाद पहली बार ऐसा समय आया है कि नौशेरा में होली के दिन मातम जैसा माहौल रहा। लोगों ने कहा कि उन्होंने सरकार के प्रति रोष जताने के लिए होली जैसे पावन पर्व को नहीं मनाया। ऐसे में यह साफ है कि लोग किस कदर सरकार से खफा है। व्यापारियों के मुताबिक होली के मौके पर बहुत ही जबरदस्त तरीके से आमदनी होती थी। नौशेरा के साथ ही सुंदरबनी और कालाकोट के लोग यहां खरीददारी करने आते थे। लेकिन सरकार के ऐसे रूख के कारण व्यापार पर भी इसका असर पड़ा है।