सामाजिक वानिकी का कार्य पंचायतों को सौंपा
राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में वन आधारित संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए सामाजिक वानिकी गतिविधियों का अधिकार पंचायतों को सौंप दिया। एसएसी ने वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी विभाग द्वारा पंचायतों को जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 2018 के प्रावधानों के अनुसार विकास को मंजूरी दी।
गांव को आधार इकाई के रूप में लिया जाएगा और संबंधित पंचायतें सामाजिक वानिकी के सहभागी दृष्टिकोण की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कार्य करेंगी। एक पंचायत में लगभग 2-3 गांव होते हैं। पौधरोपण की योजना संबंधित पंचायत की पौधरोपण समिति करेगी। पौधे सामाजिक वानिकी विभाग की ओर से दिए जाएंगे। हालांकि, गड्ढों की खुदाई और रोपण ग्राम पंचायत (वृक्षारोपण) समितियों के माध्यम से किया जाएगा।
इन कामों के लिए मजदूरों को दिन-प्रतिदिन के आधार पर काम पर रखा जाएगा। सभी कार्यों की निगरानी, मूल्यांकन और ऑडिट निर्धारित मानदंडों और नियमों के अनुसार किया जाएगा। हालाँकि हलका पंचायत और ग्राम पंचायत (वृक्षारोपण) समितियां कार्यों के निरीक्षण और जांच में शामिल होंगी। वृक्षारोपण का रखरखाव और संरक्षण वन विभाग और संबंधित ग्राम पंचायत (वृक्षारोपण) समितियों की संयुक्त जिम्मेदारी होगी।
सरकारी सभागारों में मनोरंजन कार्यक्रम होंगे, समिति गठित
एसएसी ने राज्य के विभिन्न जिलों में सरकारी व किराये के सभागारों में मनोरंजक कार्यक्रम शुरू करने के लिए औपचारिकताओं की जांच और इस उद्देश्य के लिए एक रोडमैप तैयार करने का फैसला किया है। इसके तहत वित्तीय आयुक्त वित्त विभाग को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति के सदस्यों में डीजीपी, सूचना विभाग के आयुक्त/सचिव, मंडलायुक्त कश्मीर, मंडलायुक्त जम्मू, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, संस्कृति विभाग के सचिव और जम्मू व कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के सचिव शामिल होंगे।
इसके अलावा संस्कृति विभाग द्वारा नामांकित किए जाने वाले फि ल्माें को बनाने, स्क्रीनिंग से जुडे राज्य के 2 से 3 प्रमुख व्यक्तियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। सूचना निदेशक समिति के सदस्य सचिव होगे।
समिति एक महीने के भीतर अपनी सिफारिशें और रोडमैप प्रस्तुत करेगी। वर्तमान में मनोरंजन की सुविधाएं केवल जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों में ही उपलब्ध हैं। कश्मीर संभाग में ऐसी सुविधाएं अल्प विकसित हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोग मनोरंजन के लिए अपने परिवार और दोस्तों के साथ नहीं जा सकते।
ऐसे जिलों में आम लोगों के लिए मनोरंजन का एक स्रोत प्रदान करने के लिए सरकार ने इन जिलों में उपलब्ध सरकारी व किराये के सभागारों का उपयोग करने का निर्णय लिया है।