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जम्मू-कश्मीर में 44 डिजिटल गांवों की होगी स्थापना, ग्राम स्तर पर होगा वन स्टॉप आईटी सेवा समाधान

Fri, 05 Jul 2019 03:47 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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डिजिटल विलेज प्रोग्राम - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर सरकार ने बैक टू विलेज कार्यक्रम की सफलता के बाद जेएंडके डिजिटल विलेज कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत 44 डिजिटल गांवों की स्थापना की जाएगी। इस पर पांच करोड़ रुपये खर्च होंगे। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में अगले 6 महीनों में प्रत्येक जिले से दो गांवों को लिया जाएगा। इसमें डिजिटल सेवाओं के लिए कनेक्टिविटी (फाइबर वीसैट) उपलब्ध कराया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के प्रभाव का पता लगाने के बाद शेष ग्राम पंचायतों को दूसरे चरण में लिया जाएगा। यह फैसला राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में हुई राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में किया गया।
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बैठक में जम्मू-कश्मीर ई-गवर्नेंस एजेंसी के माध्यम से जम्मू कश्मीर डिजिटल गांव कार्यक्रम शुरू किए जाने को मंजूरी दी गई। मौजूदा ग्राम पंचायत भवन को डिजिटल विलेज सेंटर (डीवीसी) के रूप में नामित किया जाएगा। केंद्रों को विभिन्न सुविधाओं सहित स्मार्ट एल ई डी, कंप्यूटर, स्क्रीन, इंटरनेट और अन्य प्रासंगिक सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। ग्रामीण विकास विभाग के ग्रामीण स्तर के कार्यकर्ता (वीएलडब्ल्यू) डीवीसी के संरक्षक होंगे, जो इन केंद्रों के समग्र प्रबंधन व सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होंगे। इन केंद्रों की देखभाल संबंधित गांव के नंबरदार, लंबरदार और चौकीदारों द्वारा की जाएगी।

डीवीसी ग्रामीण स्तर पर वन स्टॉप सेवा समाधान प्रदान करेगा, जो वाई-फाई हॉटस्पॉट, टेलीमेडिसिन, कृषि सहायता सेवा, डिजिटल भुगतान और अन्य सेवाएं प्रदान करेगा। इस प्रणाली का उपयोग हाल ही में संपन्न बैक टू विलेज कार्यक्रम के उद्देश्यों को साकार करने के लिए भी किया जाएगा। डीवीसी सरकार को अपने कार्यक्रमों और नीतियों का प्रसार करने में सक्षम करेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग करके बुनियादी विकास सेवाएं प्रदान करेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों की क्षमता प्रदर्शित करेगा।
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सामाजिक वानिकी का कार्य पंचायतों को सौंपा

राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में वन आधारित संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए सामाजिक वानिकी गतिविधियों का अधिकार पंचायतों को सौंप दिया। एसएसी ने वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी विभाग द्वारा पंचायतों को जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 2018 के प्रावधानों के अनुसार विकास को मंजूरी दी। 

गांव को आधार इकाई के रूप में लिया जाएगा और संबंधित पंचायतें सामाजिक वानिकी के सहभागी दृष्टिकोण की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कार्य करेंगी। एक पंचायत में लगभग 2-3 गांव होते हैं। पौधरोपण की योजना संबंधित पंचायत की पौधरोपण समिति करेगी। पौधे सामाजिक वानिकी विभाग की ओर से दिए जाएंगे। हालांकि, गड्ढों की खुदाई और रोपण ग्राम पंचायत (वृक्षारोपण) समितियों के माध्यम से किया जाएगा।

इन कामों के लिए मजदूरों को दिन-प्रतिदिन के आधार पर काम पर रखा जाएगा। सभी कार्यों की निगरानी, मूल्यांकन और ऑडिट निर्धारित मानदंडों और नियमों के अनुसार किया जाएगा। हालाँकि हलका पंचायत और ग्राम पंचायत (वृक्षारोपण) समितियां कार्यों के निरीक्षण और जांच में शामिल होंगी। वृक्षारोपण का रखरखाव और संरक्षण वन विभाग और संबंधित ग्राम पंचायत (वृक्षारोपण) समितियों की संयुक्त जिम्मेदारी होगी।

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सरकारी सभागारों में मनोरंजन कार्यक्रम होंगे, समिति गठित

एसएसी ने राज्य के विभिन्न जिलों में सरकारी व किराये के सभागारों में मनोरंजक कार्यक्रम शुरू करने के लिए औपचारिकताओं की जांच और इस उद्देश्य के लिए एक रोडमैप तैयार करने का फैसला किया है। इसके तहत वित्तीय आयुक्त वित्त विभाग को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति के सदस्यों में डीजीपी, सूचना विभाग के आयुक्त/सचिव, मंडलायुक्त कश्मीर, मंडलायुक्त जम्मू, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, संस्कृति विभाग के सचिव और जम्मू व कश्मीर कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी के सचिव शामिल होंगे।

इसके अलावा संस्कृति विभाग द्वारा नामांकित किए जाने वाले फि ल्माें को बनाने, स्क्रीनिंग से जुडे राज्य के 2 से 3 प्रमुख व्यक्तियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। सूचना निदेशक समिति के सदस्य सचिव होगे।

समिति एक महीने के भीतर अपनी सिफारिशें और रोडमैप प्रस्तुत करेगी। वर्तमान में मनोरंजन की सुविधाएं केवल जम्मू संभाग के कुछ हिस्सों में ही उपलब्ध हैं। कश्मीर संभाग में ऐसी सुविधाएं अल्प विकसित हैं, जिसके परिणामस्वरूप लोग मनोरंजन के लिए अपने परिवार और दोस्तों के साथ नहीं जा सकते।

ऐसे जिलों में आम लोगों के लिए मनोरंजन का एक स्रोत प्रदान करने के लिए सरकार ने इन जिलों में उपलब्ध सरकारी व किराये के सभागारों का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

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