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जम्मू-कश्मीर की जेलों में बंद अंडर ट्रायल कैदियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी पेशी

Fri, 05 Jul 2019 03:33 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू

सार

  • रिमांड के लिए भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी पूछताछ
  • समय और सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी
  • नेशनल इंफारमेशन सेंटर की मदद से हो रहा काम
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सेंट्रल जेल जम्मू - फोटो : फाइल, अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में पेशी के दौरान कोर्ट ले जाते समय किसी खूंखार आतंकी को हमला कर छुड़ाने और किसी खूंखार अपराधी के कोर्ट में अपने गुर्गों से मिलने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए जेल विभाग ने बड़ी तैयारी की है। रियासत की जेलों में बंद कैदियों की रिमांड और अंडर ट्रायल कैदियों की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग से करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि यह योजना कब जमीन पर उतरेगी यह अभी तय नहीं है।
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इस सुविधा के शुरू होने के बाद पुलिस को जब जेल में बंद किसी कैदी को रिमांड पर लेना होगा तो पुलिस उससे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही पूछताछ कर सकेंगे। इससे न सिर्फ पुलिस का वक्त बचेगा बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी यह सुरक्षित उपाय होगा। इसके अलावा अंडर ट्रायल कैदियों को भी कोर्ट में पेशी के लिए नहीं ले जाना होगा बल्कि जेलसे ही पूछताछ हो जाएगी।

कब-कब उठे सवाल
  • केस-1: 20 अगस्त को जम्मू के बिक्रम चौक पर पुरानी रंजिश में आटो चालक पर दिन दहाड़े गोली चलाई गई। हमले की पूरी योजना तब बनी जब एक अपराधी को पेशी के लिए कोर्ट लाया गया। वहीं पर उससे मिलने आए गुर्गों ने प्लानिंग की और हमले को अंजाम दिया।
  • केस-2: लगभग ढाई साल पहले बहुचर्चित अमनदीप हत्याकांड में भी जब आरोपियों को पेशी के लिए जम्मू कोर्ट लाया गया तो वहां हमले की कोशिश हुई।
  • केस-3:12 मई 2015 को उधमपुर जेल से राहिल चंदेल नाम के आरोपी को पेशी के लिए जम्मू के हाईकोर्ट लाया गया। वह कोर्ट से फरार हो गया।
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हमला कर ले गए थे आतंकी नवीद जट्ट को
कई ऐसी घटनाएं हैं, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया। सबसे बड़ी घटना 6 फरवरी 2018 की है। जब श्रीनगर की सेंट्रल जेल से आतंकी नवीद जट्ट को जेल पुलिस अस्पताल लेकर जा रही थी। तब आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर अस्पताल के बाहर हमला कर दिया। इसमें पुलिस के दो जवान शहीद हो गए। साथ ही आतंकी नवीद जट्ट को लेकर फरार हो गए।
 

जेलों की सुरक्षा को कई कदम उठा रहे
"जेलों में सीसीटीवी लगाए जा रहे हैं, इलेक्ट्रिक फेंसिंग की जा रही है, कैदियों से मिलने के मामले में सख्ती की गई है। इसके अलावा अपराधियों की रिमांड को वीडियो कांफ्रेंस पर लिए जाने और अंडर ट्रायल स्टेज को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर ले जाने का काम किया जा रहा है। यह सब जेलों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए गए हैं।"-वी के सिंह, डीजीपी, जेल विभाग

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