फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कश्मीर घाटी में पिछले एक महीने में 6 से अधिक स्थानीय युवाओ ने उठाई बंदूक

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीनगर। घाटी में आतंक की राह पकड़ चुके युवाओं के मुख्यधारा में लौटने का सिलसिला शुभ संकेत है। लेकिन आतंकी संगठनों में स्थानीय युवाओं के भर्ती होने का सिलसिला नहीं थमना चिंता का कारण भी है। एक महीने के भीतर छह युवाओं ने आतंकवाद का रास्ता अपनाया है जबकि 11 युवकों को मुख्यधारा में शामिल करवाया गया है। सुरक्षा एजेंसियाें और सरकार द्वारा भरोसा दिलाया जा रहा है कि भटके युवा लौटें, उन्हें सामान्य जीवन जीने में हर तरह से मदद की जाएगी।
विज्ञापन

संतोषजनक बात यह है कि कई महीनों से घाटी के युवाओं की आतंकवाद में भर्ती के ग्राफ में काफी कमी आई है। एक महीने के भीतर छह से अधिक ऐसे युवा हैं, जिसकी सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद उनकी आतंकवाद में शामिल होने की पुष्टि हुई है। इनमें से हाल ही में एक युवा उत्तरी कश्मीर के बारामुला से संबंध रखने वाला था जो आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोईबा में शामिल हुआ है। 19 जून 2019 को उसका सोशल मीडिया पर हथियार लेकर फोटो वायरल हुआ था। वह दो महीने पहले घर से लापता हुआ था।
बता दें कि हाल ही में बारामुला को आतंकवाद मुक्त जिला करार दिया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो के अनुसार बारामुला के आरमपोरा का रहने वाला अदनान अहमद चन्ना (20) 15 जून 2019 को लश्कर में हुआ शामिल हुआ। उसका कोड संगठन सैफुल्ला भाई रखा गया है। इससे पूर्व 10 जून को बारामुला जिले के हामरे इलाके के रेहने वाले जुनेद फारूक का हथियार के साथ फोटो वायरल हुआ था। वह 9 जून को हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। इस बीच 18 जून को पुलवामा जिले के तीन युवाओं की हथियार लेकर फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। वे हाल ही में लापता हुए थे। इन युवकों की पहचान हरकिपोरा पुलवामा के नादिम अहमद डार, त्रिचल पुलवामा के इरशाद अहमद डार और संबूरा पुलवामा के रफीक अहमद डार के तौर पर हुई है। तीनों लश्कर मे शामिल हुए हैं। इस महीने की शुरुआत में कुपवाड़ा के एक युवक की फोटो वायरल हुई थी। उसके अनुसार इरफान अहमद मीर निवासी गुलगाम 12 जून 2019 को हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था।
विज्ञापन


दक्षिण कश्मीर से 20 युवक इसी महीने लापता
अगर सूत्रों की मानें तो इस वर्ष मार्च से लेकर अभी तक करीब 50 युवा आतंकवाद में भर्ती हुए हैं, जबकि इसी महीने दक्षिणी कश्मीर से करीब 20 युवा लापता हुए हैं, जिनका अभी तक कुछ पता नहीं है। इस साल मारे जाने वाले आतंकियों की संख्या करीब 117 हो चुकी है। इनमें 28 विदेशी आतंकी हैं, जबकि बाकी स्थानीय। आतंकी गतिविधियों में शहीद होने वाले सुरक्षाबलों की संख्या भी 70 के करीब है।

कहां-कितने लौटे मुख्यधारा में
सरकार और सुरक्षाबलों के प्रयास से 11 से अधिक युवाओं को मुख्यधारा में लौटाया गया है। 31 मई को दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में पांच युवाओं को, 15 जून को बारामुला से सटी एलओसी से चार युवाओं को और 18 जून को पुलवामा जिले में दो युवाओं को मुख्यधारा में शामिल कराया गया। पुलिस द्वारा काउंसिलिंग कर उन्हें परिवार वालों को सौंपा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें