रियासी। माहौर के ग्रामीण क्षेत्र शजरू जमलान तथा जमसलान में लोगों के लिए आतंक का पर्याय बन चुके नरभक्षी तेंदुए को मारने अथवा पकड़ने में वाइल्ड लाइफ को कामयाबी नहीं मिल पाई है। इसके साथ ही सप्ताह पहले तेंदुए को मारने के लिए दी गई अनुमति भी शुक्रवार को समाप्त हो गई।
गौरतलब है कि वीरवार देर शाम को नीरम क्षेत्र में दस वर्षीय रुखसाना बानो पुत्री अब्दुल गनी को तेंदुआ हमला कर उसे जंगल की तरफ ले गया था। बाद में उसकी तलाश किए जाने पर उसका क्षत विक्षत शव जंगल से बरामद हुआ। इससे कुछ दिन पहले तेंदुए ने आठ वर्षीय दिलशाद तथा उसकी बहन पर हमला किया था, जिसमें दिलशाद की मौत हो गई थी, जबकि उसकी बहन गंभीर रूप से घायल हो गई थी। बीते मई माह के दौरान भी तेंदुए ने शजरू में आठ वर्षीय राहिला को अपना शिकार बनाया था।
डीएफओ माहौर फारूक इकबाल ने बताया कि तेंदुए को मारने की अनुमति मिलने के बाद उसका कुछ पता नहीं चल पाया है। तेंदुए को मारने के लिए तीन स्थानीय शूटर भी तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही अन्य ग्रामीण भी तेंदुए की फिराक में हैं। डीएफओ के अनुसार तेंदुए को मारने की अनुमति सिर्फ एक सप्ताह के लिए ही मिलती है। इस दौरान तेंदुए का कुछ पता नहीं चल पाया है। अब दोबारा से अनुमति के लिए वार्डन को लिखा जाएगा।