पुंछ। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर निजी कंपनियां किसानों को चूना लगा रही हैं। जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवा रखे हैं, उनके खाते से अपने आप बीमा राशि का पैसा काटा जा रहा है, लेकिन फसल नुकसान होने पर अब तक किसी भी किसान को एक रुपये का भी मुआवजा नहीं मिल पाया है।
जिला कृषि विभाग के अनुसार वर्ष 2017 में जिले के 13 मामलाें को बीमा राशि मुआवजे के लिए चयनित किया गया था, लेकिन बीम कंपनी द्वारा एक भी मामला सेटल नहीं किया गया है। इस कारण एक भी प्रभावित किसान को मुआवजा नहीं मिल पाया है। जिला कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में 47298 किसान परिवार हैं। इनमें से 31247 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड बनाए हैं। वहीं वर्ष 2017 के खरीफ की फसल के लिए जिले के 4970 किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया था। इसमें जिले से बीमा प्रीमियम राशि के तौर पर करीब 32 लाख 77 हजार रुपये बीमा कंपनियों के पास जमा हुआ था, जबकि रबी की फसल के लिए जिले के 1989 किसानों ने अपनी फसल का बीमा करवाया था। इसमें बीमा कंपनियाें के पास प्रीमियम के तौर पर करीब 10 लाख77 हजार रुपये जमा हुआ था। अगर वर्ष की दोनों फसलों की बीमा प्रीमियम राशि को जोड़ें तो बीमा कंपनियों के खाते में कुल 43 लाख 54 हजार रुपये जामा हुए। इसके बावजूद जिले के जिन 13 मामलों को बीमा के बदले उनके हुए नुकसान के लिए मुआवजे के भुगतान हेतु चुना गया, उनमें से भी किसी एक का मामला कंपनियों द्वारा सुलझाया नहीं गया। इससे यह साबित होता है कि जिले के किसानों को निजी बीमा कंपनियाें द्वारा फसल बीमा के नाम पर लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है।
पुंछ मेें गोलाबारी से होता है अधिक नुकसान
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इसके लिए मुआवजे का प्रावधान नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
पुंछ।
किसानों और कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में फसलों को सबसे अधिक नुकसान आए दिन होने वाली गोलाबारी से होता है। लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत केवल अधिक बारिश, बाढ़ अथवा सूखा पड़ने से फसलों को होने वाले नुकसान के लिए बीमा कंपनियों की तरफ से मुआवजा देने का प्रावधान है।
किसानों को पाकिस्तानी गोलाबारी से होने वाले नुकसान को खुद ही सहना पड़ता है। उन्हें प्रधानमंत्री बीमा योजना का किसी प्रकार कोई लाभ नहीं है। वहीं जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसानों की एकमात्र होने वाली मक्की की फसल को रीछ, वानर एवं अन्य कई जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाया जाता है। इस नुकसान पर भी प्रधानमंत्री बीमा योजना में किसी प्रकार के मुआवजे़ का कोई प्रावधान नहीं है। किसानों का कहना है कि हमें प्रधानमंत्री बीमा योजना में बीमा राशि का भुगतान तो करना पड़ता है, लेकिन उसके बदले कुछ भी प्राप्त न होने से हमारा पैसा जाया हो जाता है। या यूं कहें कि हमारे पैसे से बीमा कंपनियां तो मालामाल हो रही हैं और हमें कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है।
...तो योजना हो सकती है लाभदायक
किसानों का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पाकिस्तान गोलाबारी और जानवरों द्वारा किए जाने वाले नुकसान को शामिल किया जाए, तो यह योजना हमारे लिए लाभदायक हो सकती है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से मक्की एवं गेहूं की फसल के लिए 30 रुपये प्रति कनाल के हिसाब से प्रीमियम लिया जाता है और धान की फसल के लिए 35 रुपये प्रति कनाल प्रीमियम लिया जाता है। फसल का नुकसान होने पर बीमा कंपनी को मक्की और गेहूं के लिए 1500 रुपये प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा देना होता है, जबकि धान के लिए 1750 रुपये प्रति कनाल मुआवजे का प्रावधान है।
बाढ़, सूखे से हुए नुकसान के भुगतान का ही प्रावधान
जिला कृषि अधिकारी अनूप कुमार गुप्ता का कहना है कि वैसे तो मैं जिले के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जनता, क्योंकि अभी दो दिन पहले ही मैं उधमपुर से स्थानांतरित होकर आया हूं। लेकिन यह बात सही है कि फसल बीमा योजना में बाढ़ और सूखे से होने वाले नुकसान का भुगतान किए जाने का ही प्रावधान है। वहीं सहायक कृषि अधिकारी चरण जीत सिंह का कहना है कि पुंछ जिले में अगर किसानों की फसलों को सबसे अधिक नुकसान होता है तो वह पाकिस्तानी गोलाबारी और जंगली जानवरों से। किसानों को इन दो तरीकों से होने वाले नुकसान के बदले कुछ नहीं मिलता है। उनका यह भी कहना है कि बीमा कंपनी ने वर्ष 2018 के लिए किसान क्रेडिट कार्ड धारकों से खरीफ की फसल का प्रीमियम भी काटना शुरू कर दिया है।