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आज भी नही भुली आंतकवाद की काली शाम।

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पौनी। दो दशक पहले आतंक की उस काली शाम को विद्या देवी आज याद कर के सिहर जाती हैं,। 20 वर्ष पहले आतंकवादियों ने उनके परिवार जिसमें उनकी ससुराल व मायके के 13 लोगों को गोली मार कर के मौत के घाट उतार दिया था। आतंकवादियों की गोली से विद्या देवी के पति की भी मौत हो गई थी। दूसरी तरफ उसकी एक मासूम बच्ची भी मारी गई थी।
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वर्ष 1998 के अप्रैल महीने के दौरान आतंकवादियों ने जिले के प्राणकोट गांव में हमला कर वहां पर 27 लोगों की गोली मार करके हत्या कर दी थी। इस गोलीकांड में विद्या देवी के 13 रिश्तेदार मारे गए थे। विद्या देवी के अनुसार दोपहर के बाद शाम धीरे-धीरे ढल रही थी वह अन्य दिनों की भांति घर के भीतर रात का खाना बनाने के कार्य में व्यस्त थी। एकाएक गोलियों की आवाज सुनाई दी, साथ ही चीख पुकार भी मच गई। डर से वह अपने अन्य बच्चों के साथ वहीं पर दुबक कर के बैठी रही। काफी देर तक गोलियां चलती रहीं, उसके मायका भी थोड़ी ही दूरी पर था जहां पर भी आतंकवादियों ने गोलियां चलाई। काफी देर के बाद शांति हुई इसके बाद रूंदन शुरू हुआ, लेकिन थोड़ी ही देर में पूरा मंजर बदल गया था। उसके पति मोहन लाल के साथ ही ससुर अनंत राम व मासूम बच्ची की लाश पड़ी हुई थी। मायके में उसके पिता मणि राम बहन व उसकी लगभग आठ महीने की मासूम बच्ची के साथ ही पांच अन्य को गोली मार दी गई थी। उस खौफनाक मंजर को वह आज भी नहीं भूल पाई है। क्षेत्र में बढ़ते जा रहे आतंकवाद के बाद वहां से लोगों का पलायन शुरू हो गया। वह भी अपने बच्चों के साथ पलायन कर विस्थापितों की तरह पौनी में आ गई, जहां पर वह अन्य लोगों के साथ राजकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में रही। तब उनके साथ सरकारी नौकरियां को देने के साथ ही मकान वगैरह देने का भी वादा किया गया था। काफी दौड़धूप करने के बाद उसे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिली, जिसके बाद वह अपने बच्चों का पालन पोषण करने में सक्षम हुई। बाद में सिर छिपाने के लिए कोई जगह नहीं होने के बाद उन्होंने पौनी में ही जगह खरीदी। बाद में मकान भी बनवाया। दो बेटियों में से एक बेटी की शादी भी की। अब विद्या देवी कहती हैं कि तब सरकार ने उनके बच्चों को सरकारी नौकरी देने को कहा था अब उसके दोनों बेटे बारहवीं कक्षा की पढ़ाई कर चुके हैं सरकार अपने वादे को पूरा करते हुए उनके बेटों को नौकरी दे ताकि उनका भविष्य बन सके।
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