जम्मू। सीजेएम जम्मू ने फर्जी विजिलेंस कमिश्नर जावेद अख्तर की जमानत की अर्जी को रद्द कर दिया है। जावेद विजिलेंस कमिश्नर बनकर लोगों से धोखाधड़ी करता था।
केस के अनुसार आरोपी शिकायतर्ता से सितंबर 2017 में मिला। उसे शाह वली नाम के व्यक्ति ने मिलाया। शाह वली नगरोटा में पेट्रोल पंप चलाता था। शाह वली ने शिकायतकर्ता से आरोपी जावेद को मिलाया और कहा कि वह दिल्ली में विजिलेंस कमिश्नर है। शिकायतकर्ता ने उसकी इज्जत की और उसे बताया गया कि उसके केंद्र सरकार व प्रशासन में काफी बेहतर संपर्क हैं। एनसीआर और आसपास क्षेत्रों में शिकायतकर्ता ने फ्लैट खरीदने की इच्छा जताई। उसे कहा गया कि वह सस्ते में फ्लैट दिला देगा। दोनों में गुड़गांव में फ्लैट खरीदने की बातचीत हुई। फर्जी विजिलेंस कमिश्नर ने शिकायतकर्ता नंबर एक से दस लाख रुपये, शिकायतकर्ता दो से 17 लाख 41 हजार आठ सौ रुपये और शिकायतकर्ता तीन से 12 लाख रुपये हासिल किए। सभी की सर्किट हाउस में बैठक हुई। पेट्रोल पंप के अलावा कश्मीर और कुछ निजी होटलों में भी बैठक की गई। झेलम रिजार्ट, रेडसम होटल में भी मुलाकात हुई। आरोपी ने दिल्ली के प्रॉपटी डीलर के फर्जी दस्तावेज भी दिखाए। शाह अली से भी किश्तों में रुपयों दिए जाने क फैसला हुआ।
सीनियर प्रोसेक्यूटिंग आफिसर रोहित गुप्ता ने र्कोअ में बताया कि आरोपी ने अपने आप को 1989 बैच का आईआरएस आफिसर बताया। मोजूदा समय में सेंट्रल विजिलेंस कमिश्नर बताकर लोगों को ठगा। कोर्ट ने पाया आरोपी के खिलाफ गंभीर मामले हैं। इस समय में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती है। जेएनएफ