जम्मू। जीएसटी रिजीम के बाद से वित्तीय इन्सेंटिव न मिलने से बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया करा रहंीं जम्मू-कश्मीर की करीब 7000-8000 इकाइयां नुकसान उठा रही हैं। उन पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है। फेडरेशन आफ इंडस्ट्रीज, जम्मू (एफओआईजे) के चेयरमैन अध्यक्ष ललित महाजन ने वीरवार को पत्रकारों से बातचीत में यह मसला उठाया। इन इकाईयों को जल्द से जल्द इन्सेंटिव की मांग की।
बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीबीआईए) के कार्यालय में फेडरेशन के प्रतिनिधियों केसाथ ललित महाजन ने कहा कि रियासत सरकार जीएसटी से पहले सेंट्रल एक्साइज में कवर होने वाली यूनिटों को वित्तीय इन्सेंटिव देने में मतभेद कर रही है। कहा कि इन्हें 42 फीसदी सीजीएसटी का लाभ नहीं मिल रहा, जबकि यही इन्सेंटिव सेंट्रल एक्साइज केतहत कवर होने वाली 300 से 400 पुरानी यूनिटों को दिया जा रहा है।
उनका कहना था कि केंद्र भी 58 फीसदी सीजीएसटी का फायदा उन्हीं यूनिटों को दे रहा है। उन्होंने हाल ही में घोषित दो फीसदी बजटरी सपोर्ट और फ्राइट सब्सिडी का लाभ भी केवल इन्हीं यूनिटों को मिलने का मसला उठाया। कहा कि माइक्रो और स्माल स्केल इकाईयां, जो रियासत में ही अपना उत्पाद बेच रही हैं, उन्हें इससे कोई लाभ नहीं है।
उन्होंने काह कि बीते 30 साल से राज्य आतंकवाद झेल रहा है। ऐसे में मार्केटिंग ऐवन्यू कम हैं। उत्पादन लागत ऊंची है। ऐसे में कारोबार मुश्किल हो रहा है। उन्हाेंने सभी यूनिटों को सीजीएसटी का लाभ देने और बजटरी सपोर्ट के दायरे में लाए जाने की मांग की। राज्यपाल सत्यपाल मलिक से भी इस संबंध में हस्तक्षेप का आग्रह किया। इस अवसर पर मौकेपर बंसी लाल गुप्ता, दीपक दीवान, जतिंदर, अजित लाल बावा, प्रदीप वैद, अजय लंगर आदि भी मौजूद रहे