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खेत में पड़े मिले करीब ढाई सौ स्कूली बैग, हड़कंप

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राजोरी। कोटरंका के बीडीओ दफ्तर के पास शनिवार को एक खेत में कई दर्जन स्कूली बैग लावारिस पड़े मिलने से हड़कंप मच गया। गरीब बच्चों को दिए जाने वाले बैग खेत में फेंके जाने की खबर जंगल में लगी आग की तरह फैल गई और कुछ ही देर में वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इसमें कई ऐसे लोग भी थे जिनके बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे। स्कूली बैग खेते में फेंका देख लोग गुस्से से भर गए। सूचना मिलते ही कुछ समय बाद कोटरंका पुलिस व तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तहसीलदार व अन्य लोगों की मौजूदगी में खेत से करीब 250 स्कूली बैग बरामद किए।
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सभी बैग पर सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) लिखा हुआ है। इससे साफ लगता है कि बैग सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब बच्चों में वितरित करने के लिए खरीदे गए थे, लेकिन बच्चों तक पहुंचे नहीं। कोटरंका के तहसीलदार मोहम्मद रफीक ने मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार जो बैग खेत में पड़े मिले हैं, ऐसा लगता है कि विभाग के कुछ कर्मचारियों ने उन्हें बाजार में बेचने के लिए खेत में छिपाया होगा। जब वे बाजार में एसएसए वाले बैग नहीं बेच पाए तो उन्हें खेत में फेंक दिया गया होगा। क्षेत्र के लोगों और अभिभावकों ने कड़ा रोष प्रकट करते हुए कहा कि घटना की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि जिसने भी यह हरकत की है, उसे कड़ी सजा मिले। अभिभावकों ने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी तरह का छेड़छाड़ अक्षम्य है। वे ही हमारे देश का भविष्य हैं, ऐसे में जिस बैग में वे कापी किताबे रखते, उसे खेत में फेंक देना गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि विभाग ने पहले गरीब बच्चों को मुफ्त मिलने वाली वर्दियां भी समय पर नहीं बांटी थीं और अब कई दर्जन बैग खेत से मिलना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल पैदा करता है।

प्रिंसिपल को सौंपी जांच, एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
तहसीलदार ने सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल बुद्धल के प्रिंसिपल को जांच का जिम्मा सौंपते हुए एक हफ्ते में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। तहसीलदार ने अपने आदेश में लिखा है कि बैग शिक्षा विभाग ने एसएसए के तहत गरीब बच्चों में बांटने के लिए भेजे थे, लेकिन उन्हें गरीब बच्चों तक पहुंचाने के बजाय खेत में फेंक दिया गया।
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जेडईओ के बयान से पहेली और उलझी
राजौरी। कोटरंका शिक्षा जोन जेडईओ सलाह मोहम्मद के बयान से इस पूरे मामले की पहेली और उलझ गई है। जेडईओ का कहना है कि पिछले करीब पांच साल में कोटरंका शिक्षा जोन में किसी भी स्कूल के बच्चों के लिए न तो बैग खरीदे गए हैं और न ही विभाग ने कोई बैग जारी किए हैं। एसएसए के तहत स्कूली बच्चों के लिए बैग खरीदने के लिए फंड ही उपलब्ध नहीं होते हैं।
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ऐसे में ये बैग कहां से आए? और ये बैग ऐसे लावारिस किसने और क्यों फेंके ये बड़ा सवाल है।
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