खौड़ उपजिले के तहसील कार्यालय खडाहबली में वीरवार को रिश्वतखोरी का भांडा उस समय फूटा जब क्षेत्र के लोगों व भाजपा के कुछ नेता तहसील पहुंच गए। बताया जाता है कि तहसील के अधिकारी उनके पहुंचने से पहले ही कार्यालय छोड़कर फरार हो गए।
हुआ यूं कि वीरवार को तहसील खडाहबली के गांव डोरी डगेर के तीन-चार युवक एसडीएम देवेंद्र पाल भगत के कार्यालय में शिकायत करने पहुंचे कि उन्होंने आरबीए के प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया है, लेकिन हमें यह नहीं दिया जा रहा है और हमसे पैसों की मांग की जा रही है। एसडीएम जम्मू डीसी कार्यालय में बैठक में जा रहे थे इसलिए उन युवाओं की बात अधिक देर नहीं सुन पा युवाओं ने अपनी समस्या भाजपा के जिला महामंत्री जगदीश भगत, जिला प्रधान मनमोहन सिंह, स्टेट सेक्रेटरी सूरज सिंह भाऊ, मंडल प्रधान घसीटा सिंह चिब आदि को बताई। इस पर सभी तहसील पहुुंच गए। इनके पहुंचने की भनक तहसील अधिकारियों को लग गई। बताया जाता है कि तहसीलदार तथा पटवारी कार्यालय से भाग गए। मोटरसाइकिल पर भाग रहे पटवारी को पकड़ने की कोशिश भी की गई, लेकिन वह भागने मे सफल रहा। इस पर गुस्साए लोगों ने कार्यालय में ताला लगाने की कोशिशकी, लेकिन सूरज सिंह भाऊ ने इसे रोक दिया।
कार्यालय में उपस्थित गांव ढखर निवासी रीता देवी, विनोद शर्मा, सुषमा शर्मा तथा शानी देवी ने बताया कि हम भी यहां काम से आए हैं, हमसे तीन-तीन सौ रुपये जमा किए गए हैं। जो एक एजेंट के पास हैं। भाजपा नेताओं ने एजेंट से रुपये लेकर उन्हें वापस करा दिए। तहसील में उपस्थित लोगों ने बताया कि यहां पर बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता है। सनद रहे कि इसी तहसील में ही एक पटवारी ने पिता की विरासत का इंतकाल कराने के लिए रिश्वत ली थी। जिस की खबर अमर उजाला मे प्रकाशित होने पर वीरवार को तहसील से चौकीदार को भेज कर उस व्यक्ति से कहा गया कि हमें हस्ताक्षर कर के दो कि मुझसे पटवारी ने कोई पैसा नहीं लिया है। ये सब आज उसी व्यक्ति ने भाजपा कार्यकर्ताओं को बताया जो अपने पिता की विरासत का इंतकाल कराने के लिए तहसील कार्यालय में आया था तैनात पटवारी ने रिश्वत ली थी।
उधर एसडीएम देवेंद्र पाल भगत ने इस पूरे मामले में अनभिज्ञता जताई है। उनका कहना है कि इस बारे में संबंधित अधिकारियों से बात की जाएगी।