जम्मू। सरकारी डाक्टरों की निजी प्रेक्टिस पर प्रतिबंध लगाने संबंधी याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई है। जिस पर हाईकोर्ट ने अहम फैसला लेते हुए सात मार्च को सुनवाई का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस ताशी रबस्टन वाली खंडपीठ ने विचार क्रांति इंटरनेशनल और अन्य की सरकार एवं अन्य के खिलाफ इस याचिका पर शुक्रवार को यह आदेश दिया।
सामाजिक कार्यकर्ता बलविंदर सिंह की अस्पतालों में डाक्टरों की किल्लत से संबंधित दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान शकील अहमद ने कोर्ट के ध्यान में यह बात लाई। हाईकोर्ट को 21 अक्तूबर 2016 को पूर्व चीफ जस्टिस आफ इंडिया टीएस ठाकुर के आदेश की याद दिलाई। इस मामले को उन्होंने राज्य हाईकोर्ट के पास वापस सुनवाई के लिए भेज दिया था। एडवोकेट शकील अहमद ने कोर्ट के 18 नवंबर, 2011 को दिए आदेश के बारे भी बताया। इस आदेश के तहत कोर्ट स्वास्थ्य शिक्षा विभाग और शिक्षा विभाग के शिक्षकों और डाक्टरों को नौकरी से दो घंटे पहले और दो घंटे बाद की प्रेक्टिस करने की अनुमति दी थी। शकील ने कोर्ट को बताया कि 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट ने स्टेट में यह केस भेज दिया तो इस पर बात होनी चाहिए थी। इसलिए इस मामले पर दोबारा सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने 7 मार्च को इस मामले पर दोबारा सुनवाई करने का आदेश दिया। जेएनएफ