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भूमिहीन दलितों को अधिकार मिलने तक संघर्ष जारी रखने का एलान

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हीरानगर। भूमिहीन दलितों को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार हक दिलाने की मांग पर हीरानगर में शुरू किया गया आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी रहा। अनशनकारियों ने कहा कि प्रशासन भूमिहीन दलित परिवारों की आवाज को दबाने के लिए कई तरीके अपना रहा है, लेकिन जब तक पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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अनशनकारियों ने कहा कि वे किसी से भीख नहीं मांग रहे हैं, बल्कि हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक अधिकार मांग रहे हैं। भूमिहीन दलितों को जमीन देने के लिए 2012 में हाईकोर्ट में अपना फैसला सुनाया। इसमें स्पष्ट रूप से जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग को कहा गया कि दलितों को चयनित जमीनों पर बसाया जाए। इसके बावजूद भी प्रशासन जमीनों पर कब्जा जमाए बैठे भूमाफियाओं को नहीं हटा पाया। अनशन पर बैठे लोगों ने आरोप लगाया कि भूमाफिया उनका अनशन खत्म करवाने के लिए कुछ लोगों को हमारे खिलाफ भेज रहे हैं। ऐसे लोगों का है कि यह संघर्ष हम निजी स्वार्थ के लिए कर रहे हैं, जबकि करीब 200 भूमिहीन दलित परिवारों की लड़ाई लड़ी जा रही है। इस लड़ाई को प्रशासनिक और राजनीतिक तौर पर तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हम दस्तावेजों की लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर इसे पावर के दम पर खत्म किया जा सकता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
धरने में इंटरनेटलिस्ट डेमोक्रेटिक प्लेटफार्म के नेता आईडी खजूरिया भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कुछ लोग चाहते हैं कि बेघर दलित परिवार दर-दर की ठोकरें खाते रहें। चंद परिवार जो आर्थिक रूप से ताकतवर हैं, वे चाहते हैं कि उनके हिसाब से सियासत की जाए, लेकिन यह मसला सियासत का नहीं, बल्कि गरीबों को उनका अधिकार दिलाने का है। इसलिए इसे दबाने का चाहे जितना प्रयास करें, यह कमजोर नहीं पड़ेगा।
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