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कई स्टेशनरी की दुकानों पर दबिश

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कठुआ।
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जिला मजिस्ट्रेट रोहित खजूरिया के निर्देश पर लीगल मेट्रोलजी विभाग की टीम ने सोमवार को शहर की विभिन्न स्टेशनरी और यूनिफार्म विक्रेताओं के यहां दबिश दी। जांच के दौरान कई खामियां पाए जाने पर टीम ने चार दुकानों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसमें दो रेडिमेड गारमेंट स्टोर और दो स्टेशनरी विक्रेता भी शामिल हैं।
लीगल मेट्रोलजी विभाग के सहायक नियंत्रक कुलदीप राज ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर बाजार में जांच की गई है। जांच में सामने आया कि एक किताब, जिसका मूल्य काफी कम है, उसे 350 रुपये में बेचा जा रहा है। जब्त किए गए सामान के बारे में उन्होंने कहा कि कुछ ही पन्नों के ड्राइंग पैड का मूल्य 250 किया गया है। स्कूल की ओर से अभिभावकों को उसी दुकान से ड्राइंग पैड खरीदने के लिए कहा जाता है। अधिकारी ने कहा कि कुछ नोटबुक भी जब्त किए गए हैं, जिन पर कायदे से मूल्य और कुल पन्नों की संख्या अंकित होनी चाहिए, जबकि ऐसा नहीं था।
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यूनिफार्म पर साइज होना चाहिए, मूल्य और बनाने वाले का पता होना चाहिए, जबकि ऐसा भी नहीं पाया गया है। इसे देखते हुए सैंपल सीज करके लाए हैं। बाकी का माल भी दुकानदारों को मामला डिस्पोज होने तक न बेचने की हिदायत दी गई है। दुकानदार वही माल बेच सकेंगे, जिस पर एमआरपी और अन्य जानकारियां अंकित होंगी। उन्होंने कहा विक्रेताओं को रिकार्ड लेकर आने के लिए कहा गया है और उन्हें उल्लंघन पर जुर्माना भी किया जाएगा। जो लोग नहीं आएंगे उनके खिलाफ मामला कोर्ट में बढ़ाया जाएगा।
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जिला मजिस्ट्रेट ने सामाजिक मुद्दों पर भी निजी स्कूलों को आगे आने को कहा
जिला मजिस्ट्रेट रोहित खजूरिया ने कहा कि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन फीस के मामले में आगे आ रहे हैं, लेकिन अन्य सामाजिक मुद्दों पर भी उन्हें खरा उतरना होगा। टीचर्स का पीएफ, वेल्फेयर फंड आदि पर काम करना होगा, ताकि शिक्षकों की मदद की जा सके। फीस का स्ट्रक्चर ऐसा बनाएं ताकि अभिभावकों को बोझ न लगे। फीस निर्धारण कमेटी रिपोर्ट नहीं आई है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती प्राइवेट स्कूल वाजिब फीस लें। जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि प्राइवेट स्कूल लिखित में दें कि वे किस स्ट्रक्चर के तहत फीस वसूलना चाहते हैं और स्कूलों को कैटेगरी में करके भी बताएं, ताकि उन स्कूलों के इंफ्रास्स्ट्रक्चर के हिसाब से ही फीस सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि री-एडमिशन फीस आदि की वसूली और स्कूलों में स्टेशनरी आदि की बिक्री पर धारा 144 लगाई गई है। इस पर सख्ती से अमल करवाया जाएगा। जब तक लोग सामने आकर शिकायत नहीं करेंगे, तब तक कार्रवाई सुनिश्चित कर पाना संभव नहीं होता। शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखी जाएगी और ऐसे में जिन लोगों को दिक्कत है सामने आकर शिकायत करें।
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