जम्मू। सुप्रीम कोर्ट में रसाना केस पर मिले नोटिस पर 19 अप्रैल को बार एसोसिएशन अपना पक्ष रखेगी। बार एसोसिएशन के आंदोलन को सांप्रदायिक रंग दिया गया है। जिसके कारण रसाना कांड में पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिलने की आशंका जताई गई।
बार एसोसिएशन और सिविल सोसायटी की बैठक में धार्मिक, सामाजिक, गैर राजनीतिक एवं विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने अंतिम फैसला लेने के अधिकार एसोसिएशन को दिया है। बैठक में स्वागत किया गया कि बार काउंसिल आफ इंडिया ने रसाना केस की जांच के लिए कमेटी का गठन किया है। बार काउंसिल की पांच सदस्यों की टीम जल्द ही दौरा करेगी। मुद्दे को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। असल मुद्दा रोहिंग्या को जम्मू कश्मीर में बसाने का है। वकीलों ने अपना कामकाज पहले से ही 17 अप्रैल तक ठप रखा है। बार काउंसिल के हस्तक्षेप के बाद हड़ताल पर सोमवार को फैसला किया जाएगा।
बैठक मेें पनुन कश्मीर के चेयरमैन डा अजय चरंगु, जेपीपीएफ के प्रधान रिटायर्ड जस्टिस पवित्र सिंह, जेजेएसएफ के प्रधान पुष्पिंद्र सिंह मन्हास, अन्ना हजारे मूवमेंट के कोर कमेटी के सदस्य तरूण उप्पल, डा अग्निशेखर, राजपुत सभा के पवन चिब, सांबा बार एसोसएिशन के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह, युवा खत्री सभा के अध्यक्ष मुनीष चोपड़ा, डोगरा खत्री सभा के महासचिव सुमेश्वर कोहली, आईएचआरसी के महासचिव जितेंद्र कुमार, वेयर हाउस ट्रेडर्स फेडरेशन के सचिव दीपक गुप्ता, राम सेना के अध्यक्ष राजीव महाजन आदि लोग मौजूद थे।