हीरानगर। शुक्रवार की देर रात आंधी के साथ आई बारिश से हीरानगर सबडिवीजन के कई इलाकों में धान की फसल गिर गई। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। जब किसान धान की फसल को काट कर घर लाने की तैयारी कर रहे थे, उस समय मौसम के कहर ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। किसानों के मुताबिक बीमा कंपनी ने भी मुआवजा देने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे उनमें भारी रोष है।
कुछ इलाकों में किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई। पूरी तरह से तैयार फसल खेतों पर बिछ चुकी है। हालांकि संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास नुकसान की पूरी जानकारी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि सोमवार तक एग्जैक्ट फिगर बताई जा सकती है।
किसानों में फसल की बर्बादी का दुख तो है ही केंद्र सरकार की फसल बीमा योजना के प्रति भी उनमें खासा रोष है। श्यामलाल, प्रवीन कुमार, राकेश चौधरी, प्रेमलाल आदि ने बताया कि हमारे खेतों में तैयार फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। संबंधित विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई और मांग की किस नुकसान की भरपाई प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत की जाए। इसके बाद हमें यह कहा गया कि बीमा कंपनी के नियमों और शर्तों के अनुसार नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती। किसानों ने कहा कि ऐसी योजना का हम क्या करेंगे, जिसमें सिर्फ हमें सरकार को पैसे देने होंगे और सरकार हमें कुछ नहीं देगी।
बीमा कंपनियों के नियमों के अनुसार बाढ़, सूखा जैसी प्राकृतिक आपदा में हुए नुकसान को ही नुकसान माना जाएगा। यही नहीं, पांच-सात किसानों के खेत की फसल खराब होती है, तो चुनिंदा किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा। पूरे ब्लॉक का एक यूनिट है, पूरे यूनिट में अगर फसल की बर्बादी होती है तो किसानों को बीमा योजना के तहत मुआवजा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारे साथ धोखा किया जा रहा है हर महीने हमारे खाते से इस योजना के नाम पर किस प्रकार की जाती है, लेकिन जब हम नुकसान का मुआवजा मांगते हैं तो शर्त और नियम बता कर टाल दिया जाता है।