कठुआ। कठुआ शहर के बीचों बीच अवैध हॉस्टल में बच्चियों का यौन शोषण करने वाले पादरी के खिलाफ पुलिस ने धारा 376 के साथ ही पाक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। हॉस्टल से मुक्त करवाई गई बच्चियों और पादरी की मेडिकल जांच भी करवा ली गई है। शनिवार को पुलिस ने पादरी को सात दिन के रिमांड पर लिया है। ज्ञात हो कि शुक्रवार को प्रशासन ने छापा मारकर 20 बच्चों (आठ बच्चे व 12 बच्चियां) को हॉस्टल से मुक्त कराया था।
शनिवार को कठुआ पहुंचे अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बच्चे उन्हें सौंपे जाएं। जिला उपायुक्त कठुआ ने लोगों को आश्वस्त किया कि उनके बच्चे सुरक्षित हैं और अभिभावकों की वेरिफिकेशन के बाद ही बच्चे उन्हें सौंपे जाएंगे। पुलिस ने शुक्रवार शाम से ही जिस घर में पादरी और बच्चे रहते थे, वहां पहरा लगा दिया है। अवैध हॉस्टल से मुक्त करवाए गए बच्चों में से लड़कियों को नारी निकेतन तो लड़कों को बाल आश्रम में रखा गया है। शनिवार को किसी भी बाहरी व्यक्ति को बाल आश्रम या फिर नारी निकेतन में बच्चों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। पारलीवंड इलाके में चर्च के नाम पर अवैध हॉस्टल में नाबालिग बच्चियों से यौन शोषण का मामला शुक्रवार को उस समय प्रकाश में आया जब प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद टीम गठित कर छापामारी की। महिला अधिकारियों के सामने बच्चियों ने उनके साथ पादरी द्वारा यौन शोषण करने की आपबीती सुनाई थी। इसके बाद पादरी को हिरासत में ले लिया गया था।
ईसाई समुदाय के लोगों ने भी किया प्रदर्शन, बोले-पादरी दोषी है तो मिले कड़ी सजा
ईसाई समुदाय के लोगों ने भी पारलीवंड में प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। यदि पादरी दोषी है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए। यदि यह आरोप बेबुनियाद हैं तो जिन लोगों ने प्रशासन को गुमराह किया है उनके खिलाफ मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभिभावक बोले-मजबूरी में रखे थे बच्चे, बच्चों ने कभी नहीं की ऐसी कोई भी शिकायत
कठुआ। अवैध हॉस्टल में बच्चियों का यौन शोषण करने की जानकारी अभिभावकों को मिली तो वह शनिवार दोपहर को जिला सचिवालय पहुंच गए। उन्होंने बताया कि बताया कि प्रशासन से उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। जैसे ही पता चला वे सभी अलग-अलग इलाकों से बच्चों को लेने के लिए पहुंचे हैं। हैरानी की बात थी कि जहां बच्चे लगातार आरोप लगा रहे थे कि पादरी उनसे गंदी हरकतें करता था, वहीं अभिभावकों का कहना था कि बच्चों ने उनसे कभी ऐसी शिकायत नहीं की है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि पारिवारिक स्थितियों के चलते ही उन्होंने बच्चों को यहां रहने के लिए भेजा था। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शायद बच्चों ने किसी दबाव में आकर ब्यान दिए हैं। एडीसी घनश्याम सिंह ने अभिभावकों को कहा कि बच्चों के साथ क्या हो रहा है इसकी उन्हें खबर रखनी चाहिए थी। बच्चे असुरक्षित थे ऐसे में प्रशासन ने कार्रवाई की है। सभी बच्चे सही सलामत और प्रशासन की देखरेख में हैं, जिन्हें पुलिस वेरिफिकेशन के बाद अभिभावकों को सौंप दिया जाएगा।
काश! मां ने बच्ची की बात पर भरोसा किया होता
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में एक बच्ची ने बताया था कि पादरी उसे रात के समय अपने कमरे में ले जाकर गंदी हरकतें करता था, जिसके बारे में उसने अपनी मां को भी बताया था। बच्ची के मुताबिक जब उसने अपनी मां को बताया तो उसने उसकी बात को अनसुना करते हुए जवाब दिया कि वे ऐसे लोग नहीं हैं, अच्छे लोग हैं। यदि मां ने मासूम की बात पर भरोसा किया होता तो शायद उसे और अन्य बच्चियों को और ज्यादा समय तक पादरी की दरिंदगी नहीं झेलनी पड़ती। बच्चों ने मीडिया को यह भी बताया था कि पादरी की पत्नी के जाने के बाद से यह सिलसिला शुरू हुआ था। यदि बच्चे देखते थे कि बच्ची को कहां ले जाया जा रहा है तो उनकी पिटाई की जाती थी।