महानपुर तहसील के गांव बनहोड़ में डायरिया ने 116 लोगों को अपनी चपेट में लिया है। बीते दो दिनों में जहां आठ लोगों को पीएचसी महानपुर में भर्ती करवाया गया है, वहीं चालीस से अधिक लोग गांव के एक घर में अस्थायी शिविर में उपचाराधीन हैं।
कुछ अपने स्तर पर भी इलाज करवा रहे हैं। मंगलवार को छह लोगों की गंभीर हालत को देखते हुए बिलावर के उपजिला अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया।
गांव में चिकित्सकों की टीम की तैनाती भी कर दी गई, जो पीडि़तों की जांच करने में जुट गई है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रहा, वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार गांव में बड़ी संख्या में लोग बीमार हो चुके हैं।
महानपुर में हर साल आते हैं मामले
डॉक्टर
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350 कुनबों की आबादी वाले बनहोड़ गांव में वर्तमान में चालीस कुनबे डायरिया की चपेट में हैं। कई कुनबे ऐसे हैं, जिनमें डायरिया से पूरा परिवार ही पीडि़त है। गांव के पूर्व सरपंच राम नरेश ने बताया कि गांव के लोहार और तरखान मोहल्ले से सटे दर्जनों कुनबे डायरिया की चपेट में हैं।
पूर्व सरपंच के अनुसार दो दिन पहले डायरिया के मामले सामने आने शुरू हुए थे। स्थानीय निवासी सतीश कुमार ने कहा कि दूषित पानी भी कारण हो सकता है। उन्होंने बताया कि हालत यह है कि लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो चला है।
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि मामले पर नजर रखी जा रही हैै। बीएमओ बिलावर को उचित प्रबंध करने और इलाज मुहैया करवाने के निर्देश दिए गए हैं।
पिछले लगभग एक दशक से महानपुर तहसील में हर साल डायरिया फैलने के मामले सामने आते हैं। क्षेत्र के अधिकतर गांव प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर निर्भर हैं। कहीं बावलियां हैं, तो कहीं हैंडपंप। जिन इलाकों में पीएचई विभाग पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित करता है, उनकी संख्या काफी कम है और जहां होती भी है, वहां आपूर्ति पर्याप्त नहीं है। ऐसे में लोगों को मजबूरन बावलियों, हैंडपंप या फिर नालों के पानी पर निर्भर होना पड़ता है।
बीते साल चनेरा में 177 लोग डायरिया की चपेट में आए थे। गांव में अफरा-तफरी के बाद दर्जनों मरीजों को पीएचसी महानपुर में भर्ती करवाया गया था। इस बार भी ऐसा ही हुआ। बनहोड़ गांव में अब तक बड़ी संख्या में लोग डायरिया की चपेट में आ चुके हैं।
स्थानीय लोगों की मानें तो गांव में पेयजल संकट बड़ा मामला है। ग्रामीणों को हैंडपंप से पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। उधर, महानपुर और आसपास के इलाकों को पानी सप्लाई के लिए डगवेल योजना भी लगभग एक दशक से अधर में लटकी हुई है। दो बार टेंडर के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया।