अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। किश्तवाड़ के चिशोती में मचैल माता यात्रा के दौरान 14 अगस्त को बादल फटने की भीषण घटना में 108 एंबुलेंस सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए जीवनदायिनी साबित हुईं। इस हादसे में 67 लोगों की मौत हो गई, सौ से अधिक लापता हैं और 100 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हुए।
घटना के तुरंत बाद चिशोती में ड्यूटी पर तैनात पायलट आरिफ राशिद और ईएमटी सुनील कुमार ने कंट्रोल रूम को जानकारी दी। एक एंबुलेंस पहले से ही मौके पर मौजूद थी, जिसने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिया। हालात की गंभीरता को देखते हुए किश्तवाड़ और डोडा से 14 एंबुलेंस रवाना की गईं। रास्ता बंद होने के कारण घायलों को कंधों पर उठाकर दूसरे वाहनों में शिफ्ट किया गया और सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल पाडर पहुंचाया गया।
इसके बाद मिशन निदेशक के निर्देश पर कश्मीर से 18, उधमपुर और रामबन से सात, जम्मू से चार और सांबा से दो एंबुलेंस मौके पर भेजी गईं। कुल 47 एंबुलेंसों की मदद से 77 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि 31 गंभीर मरीजों को जीएमसी जम्मू रेफर किया गया। मृतकों के पार्थिव शरीर भी एंबुलेंस के जरिये उनके घरों तक पहुंचाए गए।
108 एंबुलेंस सेवा के प्रोजेक्ट प्रमुख मुश्ताक अहमद ने मौके पर तैनात पायलट आरिफ राशिद, ईएमटी सुनील कुमार और क्षेत्रीय प्रबंधक विकार लोन के कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस आपदा में 108 की टीम दिन-रात डटी रही और अपने साहस से दर्जनों जानें बचाईं।