रियासत की अदालतों में लंबित मामलों का भारी बोझ बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट केचीफ जस्टिस के निर्देश पर केसों केनिपटारे को लेकर हाईकोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई है और सभी जिलों के प्रिंसिपल जजों से प्रत्येक माह की रिपोर्ट मांगी है।
साथ ही जिला जजों को कहा गया कि अपने अधीन कोर्टों में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने का प्रयास किया जाए।
रिपोर्ट में नए आने वाले केसों के अलावा निपटाए गए केसों की रिपोर्ट भी मांगी गई। 31 दिसंबर 2015 तक रियासत के 22 जिलों में स्थित अदालतों में कुल 1,24,763 केस लंबित हैं।
इनमें 45,427 सिविल केस और 79,336 आपराधिक केस शामिल हैं। कुल लंबित केसों में से 37.62 फीसदी केस सिर्फ जम्मू और श्रीनगर में हैं, जबकि शेष 20 जिलों में 62.38 फीसदी केस हैं।
जम्मू जिले में कुल 29, 937 और श्रीनगर जिले में 17,098 केस लंबित हैं। हालांकि ओवरआल आंकड़ों पर नजर डालें तो जम्मू संभाग के मुकाबले कश्मीर संभाग के जिलों में लंबित मामलों की संख्या ज्यादा है। सबसे कम लंबित मामले कारगिल (139) और लेह (182) में हैं।
उल्लेखनीय है कि अप्रैल में नई दिल्ली में होने वाली मुख्य न्यायाधीशों की कांफ्रेंस में अदालतों में लंबित मामलों का मुद्दा भी अहम रहेगा।
सभी राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों को अदालतों में लंबित मामलों के अलावा उनके राज्य में न्यायपालिका के लिए उपलब्ध ढांचे की रिपोर्ट भी मांगी गई है, ताकि लंबित मामलों के निपटारे के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।