शहर के बीचो बीच चल रहे स्लाटर हाउस (बूचड़खाने) नगरोटा के जगती में स्थानांतरित करने का मामला कोई गति पकड़ता नजर नहीं आ रहा है। वर्ष 2007 में केन्द्र सरकार द्वारा इस परियोजना केलिए 20 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। यह मामला अभी तक टेंडर निकालने की प्रक्रिया से उपर नहीं उठ पा रहा है।
मौजूदा समय में ये पुरानी रिहाड़ी के डोगरा हाल और गुज्जर नगर में चल रहे हैं। इससे क्षेत्रवासियों में रोष है। आधुनिक स्लाटर हाउस के मामले में फिलहाल कोई गति नहीं आ रही है। नगर निगम की मानें, तो उसने जगती के खानपुर में इसके लिए जगह देखी है। 75 कनाल की भूमि पर आधुनिक बूचड़खाना तैयार किया जाना है।
इसपर बीस करोड़ की लागत का अनुमान है। सनद रहे कि पहले चरण के तहत 2.03 करोड़ रुपये सरकार द्वारा जारी भी किए जा चुके हैं। सर्दियों की राजधानी में दरबार मूव के साथ ही मांस की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में इन बूचड़खानों के नजदीक रहने वालों को गंदगी भरे माहौल में रहने के लिए विवश होना पड़ता है।
इस बात को सिरे से नकारते हुए वेटरनरी विंग के इंचार्ज डा जफर इकबाल का कहना है, बूचड़खानों में साफ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है। बाहर भी सफाई का पूरा ध्यान रखते हैं, ताकि लोगों को असुविधा न हो। वहीं नगर निगम के संयुक्त आयुक्त कपिल शर्मा ने परियोजना के आगे बढ़ने की प्रक्रिया पर कहा कि काम हो रहा है। जल्द इस दिशा में आगे कदम उठाए जाएंगे। महत्वपूर्ण परियोजना है। समय तो लगेगा।