क्षेत्र में इस समय धान की मोटी फसल लगभग पककर तैयार है। पाकिस्तानी गोलाबारी के लिए बाहरी राज्यों से मजदूर यहां आ नहीं रहे हैं। इस बीच मौसम ने अचानक से मिजाज बदल लिया। ऐसे में धान की यह फसल दांव पर लग गई है। कंबाइन मशीनें भी फिलहाल नहीं आ पाई हैं। अब धान कटाई पर संकट और बढ़ गया है।
धान की जय चैना, रतना, शरबती आदि मोटी फसल लगभग पक गई है। क्षेत्र की 40 प्रतिशत यह फसल पककर तैयार है, लेकिन अब भी बाहरी राज्यों से मजदूर नहीं पहुंचे हैं। स्थानीय मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। पाकिस्तानी गोलाबारी की दहशत से वह नहीं आ रहे हैं।
किसान शामलाल, सुभाषचंद, बलवान सिंह, रामलाल, अमरनाथ आदि ने कहा कि उन्हें न तो श्रमिक मिल रहे हैं और न ही कंबाइन मशीनें आई हैं। ऊपर से पाकिस्तान की ओर से गोलाबारी की जा रही है। परिवार के लोग शिविरों में पलायन कर चले गए हैं। ऐसे में खुद कटाई करना संभव नहीं जान पड़ता है।
ग्रामीणों के सामने तो मवेशियों को भी सुरक्षित रखने का संकट है। इस सबके बावजूद मौसम भी अपना असर दिखाने लगा है। बादल घिरे देख किसान चिंता में डूब गए हैं। किसानों का कहना है कि अगर पानी बरस गया तो फसल खराब हो जाएगी। उनके सामने तो चारों ओर से मुसीबत है।