प्रेशर हार्न से ध्वनि प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है, जिस कारण बिक्रम और सतवारी चौक में ज्यादा शोरगुल होता है।
यहां पर सामान्य से अधिक ध्वनि प्रदूषण होता है। ज्यादातर टू बाई टू बसें और दो पहिया वाहन शामिल हैं। हालांकि ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ की ओर से प्रेशर हार्न के खिलाफ अभियान का दावा किया जाता है लेकिन शहर में वाहनों की तादाद के हिसाब से बहुत ही कम मात्रा में प्रेशर हार्न वाहनों के खिलाफ कार्रवाई होती है।
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहनों पर प्रेशर हार्न की पाबंदी है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि प्रेशर हार्न ध्वनि प्रदूषण बढ़ाने के साथ-साथ हृदय रोगियों और बीमार लोगों के लिए बड़ा घातक साबित होता है।
दो पहिया वाहनों के अलावा टू बाई टू बसों में प्रेशर हार्न बजते अधिकतर बार सुनाई देते हैं। कई बार साथ से गुजरने वाले वाहन चालक प्रेशर हार्न की आवाज से अनियंत्रित हो जाते हैं और उनका वाहन पर कंट्रोल नहीं रहता है, जिससे हादसा हो जाता है, जिसमें कई इंसानी जिंदगियां चले जाने की नौबत आ जाती है।
जम्मू शहर में प्रतिदिन तीन से चार लाख वाहन जम्मू में से होकर गुजरते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रेशर हार्न का मंदिरों के शहर में कितना दबाव हो सकता है। सतवारी चौक, बिक्रम चौक को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सबसे ज्यादा शोरगुल इलाकों में दर्ज किया है।
इसके अलावा परेड और फिर ज्यूल चौक है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उक्त इलाकों में दीवाली के दो दिन पहले और दीवाली के दो दिन बाद प्रदूषण की मानीटरिंग करता है, जिसमें अब तक के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो ध्वनि प्रदूषण का स्तर हमेशा बढ़ा है। रोजाना के दिनों में भी ध्वनि प्रदूषण बहुत है।